पर्वतीय जनपद के टीटी खिलाड़ियों के अभिभावकों ने एसोसिएशन पर लगायें गंभीर आरोप

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देहरादून 14 अप्रैल । उत्तराखंड में टेबल टेनिस को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पर्वतीय जनपद चमोली के टीटी खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों ने राज्य की उत्तराखंड टेबल टेनिस एसोसिएशन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे भंग करने मांग की है। इस संबंध में उन्होंने टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया को एक विस्तृत शिकायत पत्र भेजकर एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
चमोली जनपद के टीटी खिलाड़ियों के अभिभावकों और टीटी कोच विजय कुमार द्वारा उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता में उत्तराखंड टीटी एसोसिएशन के वर्तमान पदाधिकारीयों पर आरोप लगाते हुए दूरस्थ पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों के उभरते खिलाड़ियों के साथ भेदभाव कर रहे हैं। आरोप है कि केवल बड़े शहरों की महंगी टेबल टेनिस अकादमियों और अपने करीबी खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि प्रतिभाशाली ग्रामीण खिलाड़ियों को नजरअंदाज किया जा रहा है। साथ ही एसोसिएशन में मनमाने तरीके से अपने परिचितों को पदाधिकारी और सदस्य बनाए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
खिलाड़ियों और अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रतियोगिताओं में जानबूझकर गलत ड्रॉ कराए जाते हैं, जिससे खिलाड़ियों को आपस में भिड़ाकर बाहर किया जाता है। अंपायरिंग के दौरान भी ग्रामीण खिलाड़ियों को परेशान किया जाता है और एडिशनल एंट्री के नाम पर उनका आर्थिक शोषण किया जा रहा है। इन तमाम कारणों से राज्य की टीमें राष्ट्रीय स्तर पर कमजोर प्रदर्शन कर रही हैं और शुरुआती दौर में ही बाहर हो रही हैं।
मामले को और गंभीर बनाते हुए शिकायतकर्ताओं ने प्रतियोगिताओं की तिथियों के टकराव पर भी सवाल उठाए हैं। एक ओर स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा 16 से 22 अप्रैल के बीच दिल्ली में 69वें नेशनल स्कूल गेम्स आयोजित किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड टेबिल टेनिस एसोसिएशन ने 15 से 23 अप्रैल तक इंटर स्टेट जूनियर और यूथ नेशनल टेबल टेनिस चैंपियनशिप रख दी है। ऐसे में खिलाड़ी एक ही समय में दो प्रतियोगिताओं में कैसे भाग लें, यह उनके लिए बड़ी समस्या बन गई है और इससे उन पर मानसिक दबाव भी बढ़ रहा है।
शिकायतकर्ताओं ने टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया से राज्य एसोसिएशन को भंग करने, वर्तमान अध्यक्ष और सचिव को पद से हटाया जाए और निष्पक्ष व खेल हितैषी लोगों के साथ नई एसोसिएशन का गठन किया जाने की मांग की साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो खिलाड़ी और अभिभावक शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन या न्यायालय का रुख करने के लिए बाध्य होंगे।
फिलहाल इस पूरे मामले पर टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन खिलाड़ियों के इस विरोध ने राज्य में टेबल टेनिस की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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