
हरिद्वार, 19 जून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद पिछले छह दशकों से सेवा, संस्कार, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने का कार्य कर रही है। परिषद केवल एक संगठन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन का एक सशक्त माध्यम है।
भूपतवाला, हरिद्वार में आयोजित विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में देश और दुनिया तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और मूल्यों से जुड़े रहने के साथ-साथ सामाजिक एकता और राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखना होगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के पुनर्जागरण का साक्षी बन रहा है। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और महाकाल लोक जैसी परियोजनाओं ने देश की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान की है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। केदारखंड और मानसखंड क्षेत्रों में प्राचीन मंदिरों के पुनर्विकास एवं सौंदर्यीकरण के साथ ही हरिपुर कालसी स्थित यमुनातीर्थ के पुनरुद्धार, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर और गोल्ज्यू कॉरिडोर जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से धर्मांतरण विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता और सख्त भू-कानून लागू किए गए हैं। साथ ही अतिक्रमण के विरुद्ध अभियान चलाकर सरकारी भूमि को मुक्त कराया जा रहा है तथा कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए निरंतर कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने बताया कि युवाओं को भारतीय संस्कृति और दर्शन से जोड़ने के उद्देश्य से दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज’ की स्थापना की गई है, जहां भारतीय संस्कृति, सभ्यता और दर्शन पर अध्ययन एवं शोध को बढ़ावा दिया जाएगा।
बैठक में उपस्थित संत-महात्माओं ने मुख्यमंत्री धामी को सनातन संस्कृति के संरक्षण और देवालयों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए आशीर्वाद प्रदान किया। महामंडलेश्वर स्वामी यतीन्द्रानन्द गिरि ने कहा कि उत्तराखंड में सनातन मूल्यों की रक्षा और संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जबकि महामंडलेश्वर स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश महाराज ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण को सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताया।बैठक की अध्यक्षता स्वामी विश्वात्मानन्द महाराज ने की। इस अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार, अंतरराष्ट्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे सहित देशभर से आए अनेक संत, धर्माचार्य और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।






