
नई दिल्ली/पिथौरागढ़, 28 अक्टूबर। फिल्म निर्माता एवं निर्देशक हरीश शर्मा की दो पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंट्री ‘आदि कैलाश–ए फॉरगॉटन पाथ टू द डिवाइन’ और ‘ब्राजील इन बनारस–द भैरब दत्त स्टोरी’ का चयन पहले उत्तराखंडी फिल्म फेस्टिवल 2026 के लिए हुआ है। फिल्म फेस्टिवल का आयोजन 1 से 11 दिसंबर तक किया जाएगा। इसकी शुरुआत पिथौरागढ़ से होगी और इसके बाद हल्द्वानी, रुद्रपुर और देहरादून में फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा।
हाल ही में आयोजित 11वें देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में ‘ब्राजील इन बनारस’ को सर्वश्रेष्ठ खेल डॉक्यूमेंट्री और सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, जबकि ‘आदि कैलाश’ को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन डॉक्यूमेंट्री का पुरस्कार मिला था। दोनों फिल्मों को दर्शकों की भी सराहना मिली।
संदीप झा द्वारा निर्मित, हरीश शर्मा निर्देशित और अभिनेता हेमंत पांडे द्वारा प्रस्तुत ‘आदि कैलाश’ उत्तराखंड के लेखक एवं हिमालयी ट्रैकर डॉ. ललित पंत की पुस्तक ‘अजपथों से हिमशिखरों तक’ से प्रेरित है। डॉक्यूमेंट्री में आदि कैलाश की आध्यात्मिक महत्ता के साथ हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता, स्थानीय संस्कृति और पर्यटन की संभावनाओं को दर्शाया गया है। डॉ. ललित पंत ने फिल्म को मिल रही पहचान पर प्रसन्नता व्यक्त की है। अभिनेता हेमंत पांडे ने इसे उत्तराखंड के लिए गौरव का क्षण बताया।
वहीं दीपक पारीक द्वारा निर्मित ‘ब्राजील इन बनारस’ पिथौरागढ़ में जन्मे फुटबॉल खिलाड़ी और कोच भैरब दत्त के जीवन पर आधारित है। फिल्म में उनके संघर्ष और उपलब्धियों के साथ बनारस में युवा फुटबॉल खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए किए गए उनके योगदान को दिखाया गया है।
फिल्म के निर्माता दीपक पारीक ने कहा कि देहरादून में मिली सराहना और अब उत्तराखंडी फिल्म फेस्टिवल में चयन यह दर्शाता है कि सच्ची और प्रेरणादायक कहानियां दर्शकों तक पहुंचती हैं। उन्होंने पिथौरागढ़ में फिल्म के प्रदर्शन को गर्व का क्षण बताया।
भैरब दत्त ने कहा कि वह पिथौरागढ़ में फिल्म के प्रदर्शन के दौरान जरूर मौजूद रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह उनका अपना शहर है, जहां उनका जन्म और बचपन बीता। उनके लिए यह फिल्म फेस्टिवल परिवार, बचपन के दोस्तों और पुराने साथियों से पुनर्मिलन का अवसर भी होगा।
निर्देशक हरीश शर्मा ने कहा कि देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में सफलता के बाद दोनों डॉक्यूमेंट्री का उत्तराखंडी फिल्म फेस्टिवल में चयन उनके विश्वास को और मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़ उनकी कर्मभूमि है और दोनों फिल्मों को वहां के लोगों के बीच ले जाना उनके लिए बेहद भावुक क्षण होगा। एक फिल्म उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत को समर्पित है, जबकि दूसरी पिथौरागढ़ के एक खिलाड़ी के संघर्ष और उपलब्धियों की कहानी है।
दो पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंट्री का पिथौरागढ़ से शुरू होने वाले फिल्म फेस्टिवल में चयन हरीश शर्मा के लिए खास उपलब्धि माना जा रहा है। दोनों फिल्मों की यह प्रस्तुति उनकी कर्मभूमि में एक तरह की गौरवपूर्ण वापसी भी होगी।







