ज्ञान गंगा सम्मान समारोह में शिक्षकों का सम्मान

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देहरादून 8 सितंबर ।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि शिक्षक केवल एक विद्यार्थी का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है। बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक मार्गदर्शन देना भी उतना ही जरूरी है।

मंगलवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में कुसुम कांता फाउंडेशन एवं मंथन वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से आयोजित ‘ज्ञान गंगा सम्मान समारोह एवं छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम’ में मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को सम्मानित किया और मेधावी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की। उन्होंने सम्मानित शिक्षकों और छात्रवृत्ति पाने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन केवल सम्मान और छात्रवृत्ति वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रतिभाओं को पहचान देने, शिक्षा को प्रोत्साहित करने और बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का प्रयास है। किसी बच्चे की शिक्षा में सहयोग करना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि उसके सपनों को साकार करने में सहभागी बनना है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को सदैव सर्वोच्च स्थान दिया गया है। शिक्षक विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान नहीं देता, बल्कि उन्हें दृष्टि, आत्मविश्वास और संस्कार देने के साथ उनकी प्रतिभा को पहचानकर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देता है। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बच्चों में अच्छे संस्कार और जीवन-मूल्य विकसित करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, व्यावहारिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल रहा है और राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाने पर भी ध्यान दे रही है।

उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ अपना समय देने, अच्छे संस्कार और अनुशासन सिखाने तथा हर परिस्थिति में सकारात्मक मार्गदर्शन करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चे का उज्ज्वल भविष्य केवल अच्छी शिक्षा से नहीं बनता, बल्कि विद्यालय और परिवार दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
विद्यार्थियों से मुख्यमंत्री ने बड़े सपने देखने और उन्हें मेहनत, अनुशासन तथा दृढ़ संकल्प से पूरा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि असफलताओं से सीखते हुए निरंतर लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ें, लेकिन सबसे पहले अच्छे इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनें।

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने अपनी दिवंगत पत्नी कुसुम कांता का स्मरण करते हुए कहा कि शिक्षा, साहित्य, संगीत और समाज सेवा के प्रति उनका विशेष अनुराग था। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व और राष्ट्र के भविष्य के निर्माण का आधार है।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास, विधायक सविता कपूर, प्रो. सुधारानी पाण्डेय, कुसुम कांता फाउंडेशन की संस्थापक विदुषी निशंक और आर्यन देव उनियाल सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे।

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