सतपाल महाराज बोले—विंटर डेस्टिनेशन पहल से अध्यात्म के साथ पर्यटन को भी मिला बल

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

हल्द्वानी 15 फरवरी। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर श्री हंस प्रेम योग आश्रम, संजय नगर द्वितीय बिंदुखत्ता में आयोजित विराट सद्भावना सम्मेलन में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और आध्यात्मिक गुरु सतपाल महाराज ने कहा कि सनातन धर्म का मूल तत्व मानव धर्म है, जिसमें सर्वमंगल का भाव निहित है और आज इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के अनेक देशों में भी श्रद्धा और उल्लास से मनाई जाती है। यह पर्व सामाजिक समरसता, सौहार्द और एकता का संदेश देता है। उन्होंने आध्यात्म और भौतिक विकास के समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि उत्तराखंड को पर्यटन की दृष्टि से आगे बढ़ाने के लिए विंटर डेस्टिनेशन की परिकल्पना कारगर साबित हो रही है। पहले सर्दियों में पर्यटक पहाड़ों की ओर कम आते थे, लेकिन अब अध्यात्म के साथ-साथ पर्यटन में भी वृद्धि हुई है।
महाराज ने समुद्र मंथन और भगवान शिव के नीलकंठ स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि आध्यात्म मनुष्य को अनुशासित जीवन जीना सिखाता है। जब व्यक्ति के भीतर आध्यात्मिकता का भाव जागृत होता है, तो वह स्वयं प्रेरित होकर व्यवस्थाओं को सुचारू बनाता है। उन्होंने तीन प्रकार के भक्तों का उदाहरण देते हुए जीवन में सुनी हुई बातों को आत्मसात कर आचरण में उतारने का आह्वान किया।
सम्मेलन में अमृता माताजी ने भी शिव और शक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी से सनमार्ग अपनाने की अपील की। कार्यक्रम में हजारों लोग उपस्थित रहे।
महाराज ने कहा कि ग्राम पंचायतों को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। साथ ही ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव सीधे जनता से कराने की पहल पर भी विचार हो रहा है, ताकि पारदर्शिता बढ़े और भ्रष्टाचार समाप्त हो।
इस अवसर पर बिंदुखत्ता के ग्रामीणों ने राजस्व गांव का दर्जा देने की दिशा में शीघ्र कार्रवाई की मांग को लेकर ज्ञापन भी सौंपा। कार्यक्रम में अमृता रावत, मोहन सिंह बिष्ट, हरिश्चंद्र दुर्गापाल, नवीन दुमका, संतोष दुबे, ओमप्रकाश, देव सिंह राणा सहित गणमान्य लोग मौजूद रहे।

Leave a Comment

और पढ़ें