राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर धामी ने उत्कृष्ट बुनकरों और शिल्पकारों को किया सम्मानित

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देहरादून 7 अगस्त ।राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में उत्कृष्ट बुनकरों और हस्तशिल्प कारीगरों को सम्मानित किया। समारोह का आयोजन उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद की ओर से किया गया।

मुख्यमंत्री ने बिच्छू घास (नेटल फाइबर) से निर्मित पारंपरिक वस्त्र खरीदकर स्थानीय उत्पादों और शिल्पकारों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के बुनकर और शिल्पकार केवल वस्त्र और उत्पाद तैयार नहीं करते, बल्कि अपनी कला के माध्यम से प्रदेश की संस्कृति, लोकजीवन और परंपराओं को जीवंत रखते हैं।
धामी ने कहा कि हर्षिल की ऊनी शॉल, मुनस्यारी और धारचूला की थुलमा, अल्मोड़ा की ट्वीड, छिनका की पंखी, रंगवाली पिछौड़ा, रिंगाल शिल्प और बिच्छू घास से बने उत्पाद उत्तराखंड की समृद्ध लोक विरासत की पहचान हैं। इन उत्पादों की मांग देश के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी बढ़ रही है।
278 बुनकरों को चार करोड़ से अधिक का ऋण
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत अब तक 278 बुनकरों और शिल्पियों को चार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण तथा एक करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दी जा चुकी है। इससे करीब 834 लोगों को रोजगार मिला है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम और समग्र हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना के तहत आधुनिक मशीनें, डिजाइन, प्रशिक्षण, कॉमन फैसिलिटी सेंटर और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। वरिष्ठ शिल्पकारों को शिल्पकार पेंशन योजना के जरिए आर्थिक सुरक्षा देने के साथ उत्कृष्ट कारीगरों को ‘उत्तराखंड राज्य शिल्प रत्न’ समेत विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया जा रहा है।
स्थानीय उत्पादों की खरीद को जन आंदोलन बनाने की अपील
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ के संकल्प से स्थानीय उत्पादों और कारीगरों को नई पहचान मिल रही है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, मेलों और प्रदर्शनियों के माध्यम से उत्तराखंड के उत्पादों को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाया जा रहा है। जीआई टैग मिलने से भी प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों की ब्रांड पहचान मजबूत हुई है।
धामी ने प्रदेशवासियों से स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हथकरघा या हस्तशिल्प का उत्पाद खरीदना केवल वस्तु खरीदना नहीं, बल्कि बुनकर परिवार की आजीविका, शिल्पकार के स्वाभिमान और अपनी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करना है।
समारोह में कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी, विधायक सविता कपूर, सचिव विनय शंकर पांडेय समेत बड़ी संख्या में बुनकर, हस्तशिल्पी, उद्यमी और महिला शिल्पकार मौजूद रहे।

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