
देहरादून, 11 अप्रैल 2026।उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 देश में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक निर्णय है। यह अधिनियम करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था में मजबूत प्रतिनिधित्व देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
शनिवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि यह अधिनियम भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है। उन्होंने कहा कि आज नारी शक्ति केवल एक विचार नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके संकल्प के कारण महिलाओं को ‘नीति की लाभार्थी’ से ‘नीति की निर्माता’ बनने का अवसर मिल रहा है।
कुसुम कंडवाल ने कहा कि पिछले एक दशक में केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की गई हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत लगभग 68 प्रतिशत ऋण महिलाओं को दिए गए हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और उद्यमिता की ओर अग्रसर हो रही हैं।
उन्होंने बताया कि 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। वहीं बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान से समाज में सकारात्मक बदलाव आया है और माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं का नामांकन बढ़कर 80.2 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
इसके अलावा सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत 4.6 करोड़ से अधिक खाते खोले गए हैं। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ गैस कनेक्शन, जल जीवन मिशन के माध्यम से 14.45 करोड़ घरों में नल से जल की सुविधा तथा स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण ने महिलाओं के जीवन में गरिमा और सुविधा सुनिश्चित की है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत 4.27 करोड़ से अधिक महिलाओं को पोषण सहायता प्रदान की गई है, जिससे मातृ मृत्यु दर में कमी आई है।
उन्होंने कहा कि सितंबर 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।उन्होंने बताया कि लोकसभा में महिलाओं की संख्या 1952 में 22 से बढ़कर 2024 में 75 हो गई है, लेकिन अभी भी अपेक्षित प्रतिनिधित्व प्राप्त करना शेष है। यह अधिनियम उस दिशा में एक ठोस कदम है।
कुसुम कंडवाल ने कहा कि उत्तराखण्ड न केवल देवभूमि है बल्कि नारी शक्ति की भी भूमि है। राज्य सरकार और महिला आयोग इस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।उन्होंने विश्वास जताया कि महिलाओं की नेतृत्व में बढ़ती भागीदारी से विकास अधिक संतुलित, समावेशी और टिकाऊ होगा और यह अधिनियम “विकसित भारत 2047” के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अंत में उन्होंने समाज के सभी वर्गों और मातृशक्ति से इस ऐतिहासिक पहल का समर्थन करने का आह्वान किया।






