
हरिद्वार, 11 अप्रैल 2026। गुरूकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय का 123वाँ वार्षिकोत्सव ‘प्रोत्साहन’ शनिवार को 21 कुण्डीय वैदिक यज्ञ के साथ भव्य रूप से प्रारम्भ हुआ। विश्वविद्यालय सभागार परिसर में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षाविद्, जनप्रतिनिधि और छात्र-छात्राएं शामिल हुए।
मुख्य अतिथि उत्तराखण्ड सरकार के कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि गुरुकुल कांगड़ी ने अपनी प्राचीन परम्पराओं को संरक्षित रखते हुए आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण शैक्षणिक योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि आजादी के आंदोलन में भी गुरुकुल की ऐतिहासिक भूमिका रही है और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में यहां के छात्रों की अहम भागीदारी होनी चाहिए।विशिष्ट अतिथि पुरातत्वविद् मोहन चंद्र जोशी ने गुरुकुल कांगड़ी को दयानंद सरस्वती और स्वामी श्रद्धानंद के सपनों का साकार रूप बताते हुए इसे भारतीय गौरव का प्रतीक कहा। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के माध्यम से गुरुकुल की इस ऐतिहासिक भूमि के संरक्षण का आश्वासन भी दिया।हरिद्वार की मेयर किरन जैसल ने छात्रों से गुरुकुल की गौरवशाली परंपरा के अनुरूप राष्ट्रसेवा में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया, जिससे भारत पुनः विश्वगुरु बन सके।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रतिभा मेहता लुथरा ने कहा कि गुरुकुल शिक्षा के साथ संस्कारों का समन्वय करने वाला विशिष्ट संस्थान है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में जल्द ही वोकेशनल ट्रेनिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष केंद्र स्थापित किए जाएंगे।कुलसचिव सत्यदेव निगम लंकर ने विश्वविद्यालय की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरुकुल केवल डिग्री देने वाला संस्थान नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का पवित्र शिक्षा तीर्थ है। वहीं आईक्यूएसी निदेशक पंकज मदन Madan ने वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि पिछले वर्ष विश्वविद्यालय में 315 शोध पत्र, 41 पुस्तकें, 104 अध्याय और 15 पेटेंट पंजीकृत किए गए।
कार्यक्रम से पूर्व वैदिक यज्ञ का आयोजन डॉ. दीन दयाल और डॉ. वेदव्रत के निर्देशन में किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में डॉ. ममता यादव द्वारा सितार वादन प्रस्तुत किया गया, जबकि छात्र-छात्राओं ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को आकर्षक बनाया। संचालन डॉ. हिमांशु पंडित ने किया और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. वी.के. सिंह तथा डॉ. श्वेतांक आर्य ने संयुक्त रूप से दिया।
वार्षिकोत्सव के अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में मुख्य अतिथि सहित अन्य अतिथियों ने औषधीय पौधों का वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
विश्वविद्यालय के पुरातत्व संग्रहालय द्वारा कला दीर्घा में प्रदर्शनी आयोजित की गई, जिसकी थीम स्वामी श्रद्धानंद का जीवन चरित्र रही। प्रदर्शनी के माध्यम से छात्रों को गुरुकुल के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराया गया।






