
हरिद्वार में करीब 16 किलोमीटर लंबे पक्के घाटों पर श्रद्धालु कर सकेंगे स्नान, 30 नवंबर तक पूरा होगा सौंदर्यीकरण का काम
हरिद्वार। दीपावली के अवसर पर गंगा की जलधारा नवनिर्मित घाटों तक पहुंचने के साथ ही कुंभ-2027 की तैयारियों को नया विस्तार मिल गया है। गंगा नहर की क्लोजर अवधि समाप्त होने के बाद बीती रात से नहर में पानी छोड़ा जाना शुरू हो गया है। इसके साथ ही नवनिर्मित घाटों का स्वरूप भी निखरने लगा है। आगामी कुंभ में श्रद्धालुओं को हरिद्वार में करीब 16 किलोमीटर लंबे पक्के और सुव्यवस्थित घाटों पर स्नान की सुविधा मिलेगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में हरिद्वार में कुंभ की तैयारियों के तहत आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। इसी कड़ी में गंगा तट पर स्नान घाटों के निर्माण और विस्तार का कार्य भी पूरा होने की ओर है। हरिद्वार में पहले से लगभग साढ़े 12 किलोमीटर लंबे घाट उपलब्ध हैं। इस बार सिंचाई विभाग की ओर से गंगा नहर और एस्केप चैनल पर करीब सवा तीन किलोमीटर लंबाई के 10 नए घाटों का निर्माण कराया जा रहा है।
इसके अलावा उत्तराखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड की ओर से यूपीडीसीसी के माध्यम से हरकी पैड़ी के निकट शोल क्षेत्र में धनुष पुल और सीसीआर के बीच 82 मीटर लंबा एक अन्य घाट भी बनाया जा रहा है। इन नए घाटों के तैयार होने से कुंभ के दौरान श्रद्धालुओं को गंगा स्नान के लिए अधिक स्थान उपलब्ध होगा।
नहर बंदी में दिन-रात चला निर्माण कार्य
नए घाटों के निर्माण में सबसे बड़ी चुनौती उनके जलमग्न रहने वाले हिस्सों को तैयार करना था। गंगा नहर में पानी का प्रवाह बंद रहने के दौरान ही इन हिस्सों का निर्माण और मरम्मत संभव थी। इसी सीमित अवधि का उपयोग करते हुए नए घाटों के डूब क्षेत्र का निर्माण पूरा किया गया। साथ ही पुराने घाटों के जलमग्न हिस्सों की मरम्मत भी कराई गई।
मेलाधिकारी सोनिका के निर्देशन में निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूरा करने के लिए दिन-रात निर्माण कार्य जारी रहा। इस दौरान अपर गंगा नहर पर पहले से बने 34 घाटों और एस्केप चैनल के 22 पुराने घाटों के जलमग्न हिस्सों की मरम्मत भी पूरी कर ली गई।
30 नवंबर तक पूरा होगा सौंदर्यीकरण
गंगा नहर में पानी छोड़े जाने के बाद अब नवनिर्मित घाटों पर फिनिशिंग, साज-सज्जा और सौंदर्यीकरण का काम किया जा रहा है। इन सभी कार्यों को आगामी 30 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। घाटों को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के साथ श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
भीड़ प्रबंधन में भी मिलेगी मदद
कुंभ जैसे बड़े आयोजन में घाटों की संख्या और उपलब्ध स्थान का सीधा संबंध स्नान व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन से है। प्रमुख स्नान पर्वों पर हरकी पैड़ी सहित पारंपरिक घाटों पर श्रद्धालुओं का भारी दबाव रहता है। ऐसे में नए घाटों के उपलब्ध होने से स्नानार्थियों को अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे। इससे प्रमुख घाटों पर भीड़ का दबाव कम करने और श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।
दीपावली पर नवनिर्मित घाटों तक पहुंची गंगा की धारा ने कुंभ-2027 की तैयारियों की तस्वीर भी सामने रख दी है। करीब 16 किलोमीटर लंबे पक्के घाट आगामी कुंभ में श्रद्धालुओं के लिए स्नान, सुरक्षा और बेहतर व्यवस्थाओं का आधार बनेंगे।







