
गढ़वाल रेजीमेंट के जवानों के बीच साझा कीं सैनिक परिवार से जुड़ी स्मृतियां, शहीदों को किया नमन
देहरादून 7 नवम्बर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को गढ़ीकैंट स्थित गढ़वाल ग्रीन्स प्रशिक्षण मैदान में आयोजित दीपावली मिलन कार्यक्रम में वीर जवानों के साथ दीपावली की खुशियां साझा कीं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने जवानों को अपने हाथों से मिठाई खिलाकर दीपावली की शुभकामनाएं दीं और देश की रक्षा में उनके साहस, शौर्य एवं समर्पण के प्रति आभार जताया।
जवानों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री ने उनसे आत्मीय संवाद किया। उन्होंने कहा कि गढ़वाल रेजीमेंट के वीर जवानों के बीच आकर उन्हें अपने परिवार के साथ दीपावली मनाने जैसा अनुभव हो रहा है। सैनिक उनके लिए परिवार का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि त्योहारों पर जब देशवासी अपने परिवारों के साथ खुशियां मनाते हैं, तब हमारे जवान सीमाओं पर मुस्तैद रहकर देश की सुरक्षा का दायित्व निभाते हैं। हमारे घरों में जलने वाले दीपों के पीछे सैनिकों का त्याग और उनके परिवारों का समर्पण भी है।
मुख्यमंत्री ने अपने सैनिक परिवार से जुड़ी स्मृतियां साझा करते हुए कहा कि उनका जन्म एक सैनिक परिवार में हुआ है। उनके पिता ने सेना में रहते हुए उन्हें देशसेवा, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के संस्कार दिए। उनके पिता अक्सर गढ़वाल रेजीमेंट के वीर सैनिकों की शौर्यगाथाएं सुनाया करते थे। इनमें महावीर चक्र से सम्मानित अमर शहीद जसवंत सिंह रावत के अदम्य साहस और बलिदान का विशेष उल्लेख होता था। वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध में नूरानांग मोर्चे पर उनका पराक्रम भारतीय सैन्य इतिहास का गौरवशाली अध्याय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उसी गौरवशाली रेजीमेंट के जवानों के बीच उपस्थित होकर उन्हें अपने पिता की बातें याद आ रही हैं।
उन्होंने अमर शहीद जसवंत सिंह रावत सहित देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सभी वीर सैनिकों को नमन किया। कहा कि गढ़वाल रेजीमेंट का इतिहास साहस, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और बलिदान की गौरवगाथाओं से भरा है। प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध से लेकर स्वतंत्रता के बाद हुए विभिन्न युद्धों और सैन्य अभियानों तक रेजीमेंट के जवानों ने अपनी वीरता का परिचय दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सैन्य शक्ति और सामरिक क्षमता मजबूत हो रही है। सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, सेनाओं के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों, पुलों, सुरंगों और आधुनिक संचार सुविधाओं का विस्तार भी किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों का सम्मान एवं कल्याण राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। शहीद सैनिकों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की गई है। शहीद सैनिकों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में नियुक्ति देने की व्यवस्था के तहत अनेक आश्रितों को नौकरी दी गई है। इसके लिए आवेदन की समय-सीमा भी दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष की गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि देहरादून में निर्माणाधीन सैन्यधाम का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है। यह सैन्यधाम देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के शौर्य, त्याग और बलिदान का प्रतीक बनेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सैनिक परिवारों की समस्याओं के संवेदनशीलता से समाधान और उन्हें हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिक केवल देश की सीमाओं के प्रहरी नहीं, बल्कि करोड़ों देशवासियों के सुरक्षित जीवन और खुशियों के रक्षक भी हैं। इस अवसर पर उन्होंने जवानों के साथ उनके परिवारों को भी नमन करते हुए सभी के सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।
कार्यक्रम में गढ़वाल मंडल आयुक्त आनंद स्वरूप, पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल परिक्षेत्र राजीव स्वरूप, उत्तराखंड सब एरिया के डिप्टी जीओसी ब्रिगेडियर आरएस थापा, कर्नल प्रतुल थपलियाल, लेफ्टिनेंट कर्नल रवि मोहन बिष्ट, लेफ्टिनेंट कर्नल मोहित जोशी, लेफ्टिनेंट कर्नल एसएस सिद्दीकी, मेजर केडी सिंह और सूबेदार मेजर रघुवीर सिंह भंडारी सहित सैन्य अधिकारी एवं जवान उपस्थित रहे।






