
सरकारी जमीनों की बिक्री के फैसले निरस्त कर संपत्तियां मूल विभागों को लौटाएं: कांग्रेस
जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की लीज निरस्त करने और पूरे मामले की न्यायिक निगरानी में जांच की मांग
देहरादून, 5 नवंबर। उत्तराखंड में सरकारी जमीनों और संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने के मुद्दे पर कांग्रेस ने धामी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को राज्यपाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस ने सरकार पर प्रदेश की बेशकीमती जमीनों को औने-पौने दामों पर निजी हाथों में देने का आरोप लगाते हुए ऐसे सभी फैसलों को निरस्त करने और संपत्तियों को उनके मूल विभागों को वापस लौटाने की मांग की।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि 20 दिसंबर 2022 के कैबिनेट निर्णय के माध्यम से विभिन्न विभागों की सरकारी जमीनों पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मुख्यमंत्री के स्तर पर केंद्रित कर दिया गया। पार्टी का कहना है कि यह व्यवस्था मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व और सरकार की कार्य नियमावली के अनुरूप नहीं है। कांग्रेस ने राज्यपाल को सरकारी संपत्तियों के हस्तांतरण से जुड़े विभिन्न शासनादेशों और निर्णयों की संवैधानिक वैधता की स्वतंत्र समीक्षा कराने का आग्रह किया।
जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की लीज निरस्त करने की मांग
कांग्रेस ने मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट का मामला प्रमुखता से उठाते हुए आरोप लगाया कि हजारों करोड़ रुपये बाजार मूल्य वाली 142 एकड़ भूमि और राष्ट्रीय धरोहर को 15 वर्ष के लिए लगभग एक करोड़ रुपये सालाना किराये पर निजी कंपनी को दिया गया। प्रतिनिधिमंडल ने टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि बोली लगाने वाली तीनों कंपनियां एक ही व्यक्ति से जुड़ी थीं। पार्टी ने इस पूरी प्रक्रिया को नियम विरुद्ध बताते हुए लीज निरस्त करने और उच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
ज्ञापन में उत्तराखंड निवेश एवं आधारभूत संरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) अधिनियम, 2023 के प्रावधानों के कथित उल्लंघन का मुद्दा भी उठाया गया। कांग्रेस का आरोप है कि सरकारी जमीनों को बोर्ड को हस्तांतरित करने के फैसले संबंधित विभागों और मंत्रियों की सहमति के बिना लिए गए। पटवाडांगर, नगऊ, धनौल्टी, मगरा, आईडीपीएल ऋषिकेश, डाकपत्थर, रामगढ़, एचएमटी रानीबाग, पाटकोट-मरचूला, सलेमपुर महमूद और माजरी ग्रांट सहित कई स्थानों की संपत्तियों के हस्तांतरण पर भी सवाल खड़े किए गए।
40 सरकारी संपत्तियों के हस्तांतरण पर उठाए सवाल
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पटवाडांगर और डाकपत्थर की भूमि का हस्तांतरण स्पष्ट राजस्व अभिलेखों और पैमाइश के बिना किया गया। वहीं, हरिद्वार के अलकनंदा होटल, ऋषिकेश के निरीक्षण भवनों और ब्रिटिशकालीन ऐतिहासिक भवनों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई गई। रामगढ़ के राजकीय उद्यान की भूमि में वन क्षेत्र होने के बावजूद उसके गैर-वन उपयोग की आशंका भी जताई गई।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि अनुशंसा समिति की बैठक में भूमि का मूल्य और राजस्व साझेदारी तय करने पर चर्चा अगली बैठक में किए जाने की बात थी, इसके बावजूद पटवाडांगर की 13.64 एकड़ भूमि का 90 वर्ष के लिए 37.80 करोड़ रुपये रिजर्व मूल्य पर टेंडर जारी कर दिया गया। कांग्रेस के अनुसार प्रदेश के 12 जिलों में स्थित करीब 40 सरकारी संपत्तियों का बाजार मूल्य एक लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
कांग्रेस ने पटवाडांगर, अलकनंदा होटल हरिद्वार और ऋषिकेश निरीक्षण भवन से संबंधित तीनों टेंडर तत्काल निरस्त करने, यूआईआईडीबी और सिडकुल को हस्तांतरित सभी जमीनें मूल विभागों को लौटाने तथा लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवनों को पीपीपी मोड में देने की प्रक्रिया रोकने की मांग की।
गणेश जोशी, सहकारिता भर्ती और एमबीबीएस दाखिलों का मामला भी उठाया
प्रतिनिधिमंडल ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए आवश्यक वैधानिक अनुमति देने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि न्यायालय के निर्देशों के बावजूद सरकार की ओर से अब तक आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई है।
इसके अलावा कोरोना काल में सहकारिता विभाग में हुई भर्तियों में कथित अनियमितताओं का मामला उठाते हुए स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई। कांग्रेस का आरोप है कि इन भर्तियों में अभ्यर्थियों से 20-20 लाख रुपये लेकर नौकरी देने के आरोप सामने आए थे। वहीं, एमबीबीएस की सीटों पर कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुए दाखिलों की समयबद्ध जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग भी की गई।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति की ओर से उन पर लगाए गए 210 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोपों का मामला भी राज्यपाल के समक्ष रखा। उन्होंने इस प्रकरण की सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराने की मांग की।
10 दिन का दिया अल्टीमेटम
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से आग्रह किया कि ज्ञापन प्राप्त होने के 10 दिनों के भीतर सरकारी जमीनों से जुड़े विवादित निर्णय निरस्त करने और संपत्तियों को उनके मूल विभागों को लौटाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित अवधि में सरकार ने फैसले वापस नहीं लिए तो पार्टी प्रदेश की संपत्तियों की रक्षा के लिए उच्च न्यायालय की शरण लेगी।
प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत, विधायक मदन बिष्ट और फुरकान अहमद, पूर्व विधायक मनोज रावत, प्रदेश उपाध्यक्ष सीपी सिंह और राजीव महर्षि, प्रदेश महामंत्री राजेंद्र शाह, महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला, सुरेंद्र सिंह रांगड़ और राजेश चमोली सहित अन्य नेता शामिल रहे।







