स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से एमबीबीएस दाखिले का मामले में दो गिरफतार

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देहरादून 22 सितंबर । नीट यूजी 2025 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे से एमबीबीएस में प्रवेश दिलाने के मामले में देहरादून पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर अभ्यर्थियों को मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाने के नाम पर लाखों रुपये लेते थे।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने प्रेस वार्ता में बताया कि 13 सितंबर को थाना रायपुर और क्लेमेंटाउन में अलग-अलग अभ्यर्थियों द्वारा सरकारी पोर्टल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए गए थे। जांच के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से लगाए गए दस्तावेज फर्जी पाए गए। इसके बाद रायपुर थाने में मुकदमा संख्या 380/26 और क्लेमेंटाउन थाने में मुकदमा संख्या 86/26 दर्ज किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने पुलिस अधीक्षक ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की। एसआईटी ने जांच के दौरान संबंधित दस्तावेज कब्जे में लेकर अभ्यर्थियों के शैक्षणिक संस्थानों से भी जानकारी जुटाई। जांच में दस्तावेजों पर दर्ज पते गलत पाए गए। शिक्षण संस्थानों से प्राप्त अभिलेखों के आधार पर अभ्यर्थियों के वास्तविक पतों की जानकारी सामने आई।
विवेचना के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को पूछताछ के लिए थाना रायपुर लाया। पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के अनुसार पूछताछ में रूपेश पंडित के बारे में जानकारी मिली कि वह पिछले करीब पांच वर्षों से शिक्षा परामर्श का काम कर रहा था। मेरठ में वह ‘मिकोडो पाठशाला’ नाम से कंपनी संचालित करता था और निजी विश्वविद्यालयों तथा विदेशों में एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए और बीकॉम सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों में कमीशन के आधार पर प्रवेश दिलाने का काम करता था।
पुलिस के मुताबिक अरविंद कुमार रूपेश का पुराना परिचित था। उसने अपनी बेटी परी के एमबीबीएस में दाखिले के लिए रूपेश से संपर्क किया था। इसके साथ ही उसने दो अन्य परिचितों के बच्चों के दाखिले की बात भी की। आरोप है कि रूपेश और उसके साथियों ने तीनों अभ्यर्थियों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के लिए प्रत्येक प्रवेश के एवज में 45 लाख रुपये लेने की बात कही थी। पुलिस के अनुसार तीनों अभ्यर्थियों के परिजनों से एडवांस के रूप में 20-20 लाख रुपये लिए गए थे और शेष राशि दाखिले तथा कक्षाएं शुरू होने के बाद देने की बात तय हुई थी।
जांच में पुलिस को पता चला कि रूपेश और उसके साथियों ने कथित तौर पर तीनों अभ्यर्थियों के लिए कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार कराए। इन्हीं प्रमाणपत्रों के आधार पर अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में प्रवेश लिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों में रूपेश पंडित (30) पुत्र गोपाल पंडित, निवासी पूर्णिया, बिहार, हाल निवासी द्वारिकापुरी कॉलोनी, ब्रह्मपुरी, मेरठ और अरविंद कुमार पुत्र विजयपाल सिंह, निवासी बहादरपुर खादर, लक्सर, हरिद्वार शामिल हैं।
एसआईटी मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी गहनता से जांच कर रही है। पुलिस ने कहा है कि विवेचना में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर मामले में शामिल अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

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