
देहरादून 21 अक्टूबर। पहाड़ों की संस्कृति, साहित्य और युवाओं में पढ़ने-लिखने की आदत को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से क्रिएटिव उत्तराखंड की ओर से 23 से 25 अक्टूबर तक दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में तीन दिवसीय ‘देहरादून किताब कौतिक’ का आयोजन किया जाएगा। आयोजन को लेकर बुधवार को उत्तरांचल प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी गई।
क्रिएटिव उत्तराखंड के अध्यक्ष दयाल पांडे ने बताया कि संस्था की ओर से उत्तराखंड के विभिन्न कस्बों और शहरों में अब तक 15 सफल किताब कौतिक आयोजित किए जा चुके हैं। देहरादून में आयोजित होने वाला यह 16वां आयोजन होगा। उन्होंने कहा कि किताब कौतिक का उद्देश्य पहाड़ की संस्कृति और साहित्य को बढ़ावा देने के साथ ही युवाओं और बच्चों में पढ़ने-लिखने की रुचि पैदा करना है।
आयोजन से जुड़े प्रवीन कुमार भट्ट ने कहा कि किताब कौतिक का मकसद केवल देहरादून में 80 हजार पुस्तकें लाना नहीं, बल्कि युवाओं के मन में जिज्ञासा, रचनात्मकता और पढ़ने की आदत के बीज बोना है। तीन दिवसीय आयोजन में साहित्यिक परिचर्चा, पुस्तक चर्चा, प्रसिद्ध लेखकों से संवाद, विज्ञान एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े कार्यक्रम, प्रकृति भ्रमण, साहसिक गतिविधियां, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और विभिन्न कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
उन्होंने बताया कि देशभर से साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता, रंगकर्मी और विषय विशेषज्ञ कार्यक्रम में शामिल होंगे। बच्चों और आम लोगों के लिए करियर परामर्श, काव्य गोष्ठी, सांस्कृतिक संध्याएं तथा विभिन्न प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी।
किताब कौतिक के प्रथम चरण में 14 से 18 अक्टूबर तक देहरादून के विभिन्न विद्यालयों के बच्चों के लिए पांच दिवसीय बाल प्रहरी बाल लेखन कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें बच्चों ने स्वयं हस्तलिखित पुस्तकें तैयार कीं। इन पुस्तकों का स्टॉल भी किताब कौतिक में बच्चों की ओर से लगाया जाएगा।
पहले दिन 23 अक्टूबर को उद्घाटन के बाद देहरादून के इतिहास, विरासत और भविष्य, देहरादून के साहित्यिक परिदृश्य, उत्तराखंड की सैन्य विरासत और अंटार्कटिका से जुड़े अनुभवों पर परिचर्चाएं होंगी। शाम को हिंदी कवि सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें राकेश चंद्र जुगराण, वीरेंद्र डंगवाल ‘पार्थ’, लक्ष्मी प्रसाद बडोनी, डॉ. राम विनय सिंह, अतुल शर्मा, मोनिका मंतशा, प्रकाश पांडे, दयाल पांडे और नीरज नैथानी शामिल होंगे।
24 अक्टूबर को उत्तराखंड में भाषाई लेखन, भाषा आंदोलन, विकास और भाषा शिक्षण पर विभिन्न सत्र होंगे। ‘कहो कालिदास’ पुस्तक पर चर्चा के साथ लोकगीत और जागर की प्रस्तुति भी होगी। इसमें डॉ. बसंती बिष्ट और डॉ. माधुरी बड़थ्वाल भाग लेंगी।
25 अक्टूबर को सुबह प्रकृति भ्रमण के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होगी। इसके बाद हिंदी साहित्य, हिमालयी विकास की दिशा और युवाओं से जुड़े विषयों पर परिचर्चाएं होंगी। ‘कुल जमा कवि’ पुस्तक पर चर्चा तथा समापन सत्र के साथ तीन दिवसीय आयोजन का समापन होगा।
प्रेस वार्ता में दयाल पांडे, प्रवीन कुमार भट्ट, विजय भट्ट, मनोज पांडे, डीके पांडे, हेम पंत सहित आयोजन समिति से जुड़े अन्य सदस्य मौजूद रहे।चाहें तो मैं इसका और छोटा, अखबार में छपने योग्य संस्करण भी बना सकता हूं।









