
राम-सीता विवाह के मंचन पर पूरे पंडाल में हुई पुष्पवर्षा, धनुष खंडन और परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने बांधा समां
देहरादून 14 अक्टूबर। श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून की ओर से आयोजित ‘भव्य रामलीला महोत्सव-2026’ का तृतीय दिवस ‘राज्य आंदोलनकारी सम्मान दिवस’ के रूप में मनाया गया। श्री गुरु नानक मैदान, रेसकोर्स में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले प्रदेशभर के आंदोलनकारियों और राज्य आंदोलनकारी मंच के पदाधिकारियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री एवं उत्तराखंड कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत रहे। इस दौरान सीता स्वयंवर, शिव धनुष खंडन और परशुराम-लक्ष्मण संवाद का भव्य मंचन किया गया। भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष तोड़े जाने के दृश्य ने दर्शकों में उत्साह भर दिया, जबकि राम-सीता विवाह के प्रसंग के दौरान पूरे पंडाल में हुई पुष्पवर्षा से माहौल भक्तिमय हो गया। आकर्षक प्रकाश व्यवस्था के साथ लेजर और साउंड शो ने भी दर्शकों का मन मोह लिया।
रामलीला में विभिन्न राजाओं के हास्यपूर्ण अभिनय ने दर्शकों का मनोरंजन किया। इसके बाद परशुराम-लक्ष्मण संवाद का प्रभावशाली मंचन हुआ। कलाकारों ने पारंपरिक संवादों और पौराणिक चौपाइयों के माध्यम से अपनी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन किया।
समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण लंबे जनआंदोलन, संघर्ष, त्याग और बलिदान का परिणाम है। राज्य निर्माण आंदोलन में प्रदेशभर के आंदोलनकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी है। इसी उद्देश्य से महोत्सव का तृतीय दिवस राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान को समर्पित किया गया।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1952 से पुरानी टिहरी में आयोजित होती आ रही ऐतिहासिक रामलीला को टिहरी के जलमग्न होने के बाद देहरादून में पुनर्जीवित कर उसकी परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है। वर्ष 2025 में महोत्सव को विभिन्न माध्यमों से 82 लाख से अधिक दर्शकों ने देखा था। इस वर्ष डिजिटल प्रसारण, लेजर-साउंड शो, पारंपरिक रामलीला और उत्तराखंड की लोक संस्कृति के माध्यम से एक करोड़ से अधिक दर्शकों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्य अतिथि डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों का संघर्ष, त्याग और बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनके संघर्ष से ही उत्तराखंड राज्य का सपना साकार हुआ। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को राज्य आंदोलन के इतिहास और प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना सभी की जिम्मेदारी है।
राज्य आंदोलनकारी मंच के अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान को याद करना महत्वपूर्ण है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को राज्य आंदोलन के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर राज्य आंदोलनकारी मंच के अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती, देवेंद्र नौडियाल, महामंत्री रामलाल खंडूरी, अमित ओबेरॉय, सत्या पोखरियाल, विजयलक्ष्मी गुसाईं समेत प्रदेशभर से जुड़े आंदोलनकारियों और मंच के पदाधिकारियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में पार्षद कोमल वोहरा, संगीता गुप्ता, डॉ. मंजू त्रिपाठी, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के सचिन जौली, पूर्व पार्षद अनूप कपूर सहित समिति के पदाधिकारी, कलाकार और बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
महोत्सव के तहत 8 से 25 अक्टूबर तक मेले और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। रामलीला का मंचन 11 से 21 अक्टूबर तक होगा। 20 अक्टूबर को दशहरे पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा, जबकि 21 अक्टूबर को भगवान श्रीराम के राजतिलक का आयोजन होगा।







