1952 की ऐतिहासिक रामलीला का देहरादून में फिर होगा भव्य मंचन, कलश यात्रा से महोत्सव का शुभारंभ

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देहरादून 9 अक्टूबर ।पुरानी टिहरी की वर्ष 1952 से चली आ रही ऐतिहासिक रामलीला को देहरादून में पुनर्जीवित करने के संकल्प के तहत श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952 की ओर से शुक्रवार को भव्य कलश यात्रा के साथ ‘रामलीला महोत्सव 2026’ का शुभारंभ किया गया। प्राचीन हनुमान मंदिर, घंटाघर से शुरू हुई कलश यात्रा पलटन बाजार, राजा रोड, प्रिंस चौक और त्यागी रोड होते हुए श्री गुरु नानक मैदान, रेसकोर्स पहुंची।

कलश यात्रा में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। गढ़वाल के ढोल-दमाऊं और शिव ढोल, जौनसार की रणसिंगा वाद्य परंपरा, कुमाऊं का प्रसिद्ध छोलिया नृत्य और पंजाबी ढोल ने यात्रा में उत्साह और उल्लास का रंग भर दिया। सजे-धजे घोड़ों पर भगवान श्रीराम का ध्वज लेकर घुड़सवारों ने यात्रा की अगुवाई की। घोड़े-बग्गी, बैंड-बाजे, रामधुन, देव डोली और विभिन्न झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं।

राम झांकी में 10 फीट ऊंचे हनुमान जी और 12 फीट ऊंचे जामवंत जी की प्रतिमाओं के साथ वानर सेना और जामवंत के प्रतिरूपों ने श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा। भगवान राम दरबार और भगवान वाल्मीकि की झांकी ने भी लोगों को आकर्षित किया।

जंगम शिवालय में टपकेश्वर के महंत श्री 108 कृष्णागिरी महाराज ने पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। पलटन बाजार में कालिका मंदिर समिति की ओर से प्रसाद वितरित किया गया। यात्रा का करीब 11 स्थानों पर व्यापारियों, क्षेत्रवासियों और पार्षदों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। रेसकोर्स मैदान पहुंचने पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद यात्रा का समापन हुआ और श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।

समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर ने बताया कि पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला को टिहरी के जलमग्न होने के बाद देहरादून में भव्य रूप से पुनर्जीवित किया गया है। वर्ष 2025 में आयोजित रामलीला को विभिन्न माध्यमों से 85 लाख से अधिक दर्शकों ने देखा था। इस वर्ष डिजिटल माध्यमों के जरिए इसे एक करोड़ से अधिक दर्शकों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने बताया कि 11 से 21 अक्टूबर तक श्री गुरु नानक मैदान, रेसकोर्स में होने वाले महोत्सव में रामलीला मंचन के साथ उत्तराखंड की लोक संस्कृति की प्रस्तुतियां भी होंगी। गढ़वाल के ढोल-दमाऊं, जौनसारी रणसिंगा, कुमाऊं के छोलिया सहित विभिन्न लोक कलाओं को मंच दिया जाएगा। आधुनिक डिजिटल तकनीक और सीधा प्रसारण व्यवस्था के माध्यम से रामलीला को देश-दुनिया के दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा।

महोत्सव में भजन संध्या, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भव्य मेले का भी आयोजन होगा। 20 अक्टूबर को रावण, कुंभकर्ण, मेघनाद और लंका के पुतलों का दहन किया जाएगा। वहीं 11 अक्टूबर को शाम छह बजे रामलीला स्थल पर पंचतत्व बैंड का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें उत्तराखंड की लोक संस्कृति और संगीत को आधुनिक प्रस्तुति के साथ पेश किया जाएगा।

कलश यात्रा में पूर्व विधायक राजकुमार, रेसकोर्स गुरुद्वारे के अध्यक्ष बलबीर सिंह बन्नी, कालिका मंदिर समिति के संजय आनंद, बजरंग दल के विकास वर्मा, संजय कनौजिया कद्दू, पवनदीप कुकरेजा, पार्षद अर्जुन सोनकर, वीरेंद्र बिष्ट, मुकेश सिंघल, पंकज मेसोन, सुशील अग्रवाल, जावेद आलम, अमित पंत, दुर्गा भट्ट, अजय पैन्यूली, गिरीश पैन्यूली, नीता बहुगुणा, शशि पैन्यूली, नरेश कुमार समेत बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी और श्रद्धालु मौजूद रहे।

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