सैन्यधाम की लागत और निर्माण प्रगति सार्वजनिक करने की मांग, पूर्व सैनिक विभाग का धरना

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देहरादून 21 सितंबर ।सैन्यधाम परियोजना में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सैनिक विभाग ने सोमवार को सैन्यधाम परिसर में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया। धरने से पहले कांग्रेस भवन में एकत्र हुए पदाधिकारी और कार्यकर्ता सैन्यधाम पहुंचे, जहां शहीदों और सैनिकों को नमन कर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।

पूर्व सैनिक विभाग के अध्यक्ष कर्नल राम रतन नेगी ने कहा कि सैन्यधाम शहीद सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान से जुड़ा विषय है। उन्होंने परियोजना की स्वीकृत लागत, अब तक हुए खर्च, कार्यों के आवंटन, निविदाओं, कार्यादेशों, लागत में हुए संशोधनों और वर्तमान निर्माण प्रगति का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने परियोजना की स्वतंत्र जांच कराने और इसे निर्धारित समयसीमा में पूरा करने की मांग भी उठाई।

कर्नल नेगी ने सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी के सैन्यधाम से चुनावी लाभ लेने संबंधी बयान की आलोचना की। धरने में मौजूद पूर्व सैनिकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे पर मंत्री के त्यागपत्र की मांग का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया।

कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष सुजाता पॉल ने गणेश जोशी से जुड़े विभिन्न विभागीय और राजनीतिक मुद्दे उठाते हुए सरकार से भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़े आरोपों पर जवाब देने की मांग की। उन्होंने उद्यान विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों, मसूरी विधानसभा क्षेत्र में जंगलों के कटान और पर्यावरणीय क्षति, नियमों के विपरीत भूमि दिए जाने के आरोपों तथा रेहड़ी-पटरी कारोबारियों से जुड़े मामलों को भी उठाया।

कांग्रेस प्रवक्ता एवं अधिवक्ता पंकज क्षेत्री ने गणेश जोशी से जुड़े आय से अधिक संपत्ति के मामले और न्यायालय की कार्यवाही को लेकर दिए गए सार्वजनिक बयानों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि न्यायालय से संबंधित मामलों में सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों को न्यायिक प्रक्रिया और संस्थाओं की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।

धरने के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ‘सैन्यधाम का हिसाब दो’ के तहत सरकार से पूछा कि परियोजना की स्वीकृत लागत कितनी है, अब तक कितना खर्च हुआ है, लागत में कितनी बार संशोधन किया गया, किस एजेंसी को कौन सा कार्य दिया गया, कितना काम पूरा हो चुका है और शेष कार्य कब तक पूरा किया जाएगा।

धरना स्थल पर जवाबदेही का प्रतीकात्मक संदेश देते हुए एक खाली कुर्सी रखी गई, जिस पर ‘जवाबदेह सरकार के प्रतिनिधि के लिए’ लिखा था। संबंधित अधिकारी को वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया। इस दौरान परियोजना की लागत, व्यय, निविदाओं, कार्यादेशों, संशोधनों, वर्तमान प्रगति और समयसीमा को सार्वजनिक करने तथा स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग वाला प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया।

धरने के अंत में दो प्रस्ताव और मांग-पत्र एसओ राजपुर पीडी भट्ट के माध्यम से सरकार को भेजे गए। कार्यक्रम में कर्नल राम रतन नेगी, सुजाता पॉल, अधिवक्ता पंकज क्षेत्री, गोपाल सिंह गड़िया, विजय गोस्वामी, रविंदर सिंह बर्तवाल, सरजीत कृषाली, राम सिंह बिष्ट, वीरेंद्र सिंह बिष्ट, ब्रिगेडियर डंगवाल, वीरेंद्र सिंह, कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह और प्रदेश कांग्रेस महासचिव राजेंद्र शाह सहित कई पूर्व सैनिक और कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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