धार्मिक और पर्यटन स्थलों को जोड़ने के साथ सुगम होगी पहाड़ की राह, छह परियोजनाएं प्राथमिकता में
देहरादून 20 सितंबर ।उत्तराखंड को देश का प्रमुख रोपवे केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य और केंद्र सरकार की साझेदारी में करीब 160 किलोमीटर लंबाई की 51 रोपवे परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। इन परियोजनाओं के जरिए धार्मिक और पर्यटन स्थलों को बेहतर कनेक्टिविटी देने के साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में परिवहन को सुगम, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल बनाने पर जोर है।
मुख्यमंत्री ने कार्यदायी संस्थाओं को आगामी नौ नवंबर तक रोपवे परियोजनाओं के कार्य धरातल पर शुरू करने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार रोपवे को सड़क परिवहन के बेहतर विकल्प के रूप में विकसित कर रही है। इससे दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच आसान होने के साथ तीर्थाटन और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
बढ़ते पर्यटन को देखते हुए जरूरी हुई रोपवे कनेक्टिविटी
उत्तराखंड में पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2025 में प्रदेश में छह करोड़ तीन लाख से अधिक पर्यटक और तीर्थयात्री पहुंचे। बढ़ते यातायात के कारण सड़कों पर दबाव और वाहनों से होने वाला प्रदूषण भी बढ़ रहा है। ऐसे में रोपवे को वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था के तौर पर विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। जिन दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण कठिन है, वहां रोपवे के माध्यम से आवागमन आसान बनाया जा सकेगा।
छह परियोजनाएं प्राथमिकता में
सरकार ने छह रोपवे परियोजनाओं को प्राथमिकता में रखा है। इनमें सोनप्रयाग-केदारनाथ, गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब, रानीबाग-हनुमानगढ़ी-कैंची धाम, कनकचौरी-कार्तिक स्वामी, जोशीमठ-औली-गोरसों और रैथल-दयारा बुग्याल रोपवे शामिल हैं।
मसूरी रोपवे का निर्माण प्रगति पर
देहरादून जिले में पुरुकुल गांव से लाइब्रेरी मसूरी तक करीब 5.2 किलोमीटर लंबे रोपवे का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके बनने के बाद देहरादून से मसूरी तक का करीब एक से डेढ़ घंटे का सफर 15 से 20 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।
यमुनोत्री और पूर्णागिरि के लिए भी रोपवे
जानकी चट्टी (खरसाली)-यमुनोत्री रोपवे बनने से श्रद्धालुओं को जानकी चट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक करीब पांच किलोमीटर की खड़ी पैदल चढ़ाई से राहत मिलेगी। इसी तरह चंपावत के ठुलीगाड़-पूर्णागिरि रोपवे से पूर्णागिरि धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा आसान होगी। इस वर्ष एक अप्रैल से 19 सितंबर तक 24 लाख 62 हजार 319 श्रद्धालु पूर्णागिरि धाम पहुंच चुके हैं।
23 परियोजनाओं की हो रही संभाव्यता जांच
उत्तराखंड मैट्रो रेल कॉरपोरेशन को विभिन्न जिलों में कई रोपवे परियोजनाओं की संभाव्यता जांच के लिए जिम्मेदारी दी गई है। अल्मोड़ा में रानीखेत-चौबटिया, कसारदेवी-अल्मोड़ा, दूनागिरी, द्वाराहाट-कुकुछीना-पांडुखोली, चौखुटिया-तरगताल-कुकुछीना और चौघानपाटा-बेस अस्पताल सहित सात परियोजनाएं शामिल हैं। नैनीताल में नवगढ़ क्लब तल्लीताल बाजार से गंगनाथ मंदिर के नीचे तक रोपवे प्रस्तावित है।
देहरादून जिले में कैमल बैक रोड से लाल टिब्बा, जॉर्ज एवरेस्ट और कैंपटी फॉल, मल्टीलेवल पार्किंग से चिक चॉकलेट, जॉर्ज एवरेस्ट हाउस से भद्राज मंदिर, टपकेश्वर महादेव मंदिर से गुच्चूपानी, गुच्चूपानी से पैसिफिक मॉल, पैसिफिक मॉल से पैसिफिक गोल्फ, पैसिफिक मॉल से पुरुकुल, पैसिफिक गोल्फ से सहस्रधारा तथा रायपुर-मालदेवता और मालदेवता-धनोल्टी समेत कई मार्गों की संभाव्यता जांच की जा रही है।
नीलकंठ और हरिद्वार रोपवे पर विशेष फोकस
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार के अनुसार ऋषिकेश त्रिवेणी घाट से पौड़ी जिले के नीलकंठ मंदिर और हरिद्वार के इंटीग्रेटेड रोपवे पर प्राथमिकता से काम किया जा रहा है। नीलकंठ रोपवे की कुल लंबाई करीब छह किलोमीटर प्रस्तावित है, जबकि पहले चरण में त्रिवेणी घाट से नीलकंठ महादेव मंदिर तक 4.1 किलोमीटर लंबे रोपवे का निर्माण किया जा रहा है। इसके बनने से ऋषिकेश में यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
हरिद्वार में चंडी देवी-मंसादेवी रोपवे परियोजना के तहत मौजूदा अलाइनमेंट के अलावा दो समानांतर नए अलाइनमेंट विकसित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए रोपवे कनेक्टिविटी बेहद महत्वपूर्ण है। इससे धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी, सड़कों पर यातायात का दबाव कम होगा और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।









