विकास प्राधिकरणों को सीएम धामी के सख्त निर्देश,

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15 अक्टूबर तक सौंदर्यीकरण कार्य पूरे करने और 15 दिन में प्राधिकरण क्षेत्रों की सड़कें दुरुस्त करने के निर्देश

देहरादून 02 सितंबर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों को लंबित मास्टर प्लान और विकास परियोजनाओं में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी और प्रत्येक कार्य के लिए स्पष्ट समय-सीमा तथा संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

मुख्यमंत्री आवास में आवास विभाग के नियंत्रणाधीन समस्त विकास प्राधिकरणों की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने मास्टर प्लान, नागरिक सुविधाओं, सौंदर्यीकरण, पार्किंग, आवासीय योजनाओं और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की विस्तार से समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बड़े स्तर पर सौंदर्यीकरण कार्य शुरू किए जाएं और इन्हें 15 अक्टूबर तक पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि सौंदर्यीकरण का स्वरूप और गुणवत्ता G20 समिट के दौरान किए गए कार्यों की तरह आकर्षक और प्रभावी होनी चाहिए। बजट की कमी को किसी भी विकास कार्य में देरी का बहाना नहीं बनाया जाएगा।

उन्होंने विकास प्राधिकरण क्षेत्रों की सभी सड़कों का सर्वे कर खराब सड़कों की प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले 15 दिनों के भीतर प्राधिकरण क्षेत्रों की सड़कों को बेहतर स्थिति में लाया जाए और कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए।

हर प्राधिकरण में बनेगा अवैध निर्माण मॉनिटरिंग डैशबोर्ड

अवैध निर्माण के खिलाफ मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि कार्रवाई निर्माण पूरा होने का इंतजार करने के बजाय शुरुआती स्तर पर ही की जानी चाहिए। इसके लिए GIS, सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित की जाएगी।

उन्होंने प्रत्येक विकास प्राधिकरण में Illegal Construction Monitoring Dashboard विकसित करने के निर्देश दिए। इस डैशबोर्ड पर संदिग्ध निर्माण की पहचान, निरीक्षण, नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण तक की कार्रवाई की रियल टाइम जानकारी उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि अवैध निर्माण में अधिकारियों की मिलीभगत पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

सिटी पार्क और पिंक टॉयलेट होंगे अनिवार्य

मुख्यमंत्री ने सभी शहरों में सिटी पार्क विकसित करने और प्रत्येक सिटी पार्क में सामान्य टॉयलेट के साथ पिंक टॉयलेट की व्यवस्था अनिवार्य करने के निर्देश दिए। शहरी, अर्द्धशहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी आवश्यकता के अनुसार पिंक टॉयलेट विकसित किए जाएंगे।

उन्होंने अधिकारियों को अगली समीक्षा बैठक तक इस लक्ष्य का करीब 70 प्रतिशत हासिल करने के निर्देश दिए। सार्वजनिक सुविधाओं के विकास में महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की जरूरतों को प्राथमिकता देने को कहा गया।

देहरादून और हरिद्वार में पार्किंग संकट के समाधान पर जोर

मुख्यमंत्री ने देहरादून और हरिद्वार क्षेत्र में पार्किंग की समस्या का स्थायी समाधान तैयार करने के निर्देश दिए। एमडीडीए और एचआरडीए संबंधित नगर निकायों के साथ समन्वय कर मल्टी-लेवल पार्किंग, सरफेस पार्किंग, पेरीफेरल पार्किंग और पीपीपी मॉडल के माध्यम से पार्किंग विकसित करने की कार्ययोजना तैयार करेंगे।

बैठक में ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति प्रणाली को सभी जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों के साथ एकीकृत करने के भी निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया पारदर्शी, सरल और समयबद्ध होनी चाहिए, ताकि नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए सभी जनपदों से योजना का लाभ ले चुके अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और बीपीएल परिवारों की विस्तृत सूची 15 दिन के भीतर मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

उन्होंने प्रत्येक जनपद में आवासीय परियोजनाओं की प्रगति, पूर्ण और निर्माणाधीन आवासों का स्पष्ट विवरण तैयार करने तथा धीमी गति वाली परियोजनाओं में तेजी लाने को कहा।

मुख्यमंत्री ने लैंड पूलिंग योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कम से कम दो से तीन विकास क्षेत्रों में लागू करने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि किसानों और भूमि मालिकों के हितों और उन्हें मिलने वाले लाभ का पारदर्शी मॉडल तैयार किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास प्राधिकरणों की भूमिका केवल शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। प्राधिकरण क्षेत्र में आने वाले ग्रामीण और अर्द्धशहरी क्षेत्रों में भी स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों के साथ समन्वय कर स्ट्रीट लाइट, पेयजल और बैठने जैसी बुनियादी नागरिक सुविधाओं का विकास किया जाए।

बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव विनय शंकर पाण्डेय, डॉ. आर. राजेश कुमार सहित सभी विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष और संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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