युवाओं में बढ़ रही किडनी की समस्या

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देहरादून, 12 अगस्त। किडनी की बीमारी को लेकर यह धारणा कि यह केवल बुजुर्गों को होती है, अब खतरनाक मिथक साबित हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, खराब खान-पान, डिहाइड्रेशन और कुछ दवाओं के अनियंत्रित इस्तेमाल के कारण युवाओं में भी किडनी की बीमारी का खतरा बढ़ रहा है।

RG हॉस्पिटल्स देहरादून के यूरोलॉजी, एंड्रोलॉजी एवं रीनल ट्रांसप्लांट कंसलटेंट डॉ. नीतीश देव ने बताया कि उनके पास 20 से 30 वर्ष की उम्र के ऐसे मरीज भी पहुंच रहे हैं, जिनमें किडनी डैमेज की समस्या सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि किडनी की बीमारी अक्सर लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के बढ़ती रहती है। यही कारण है कि युवाओं को समय रहते इसकी जांच कराने की जरूरत है।डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर प्रमुख जोखिम
विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों की कमी, बढ़ता मोटापा और अधिक प्रोसेस्ड व नमकीन भोजन युवाओं में किडनी संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ा रहे हैं। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित न रखने पर समय के साथ किडनी को नुकसान पहुंच सकता है।
गर्मी, अत्यधिक व्यायाम या बाहर काम करने के दौरान शरीर में पानी की कमी भी किडनी के लिए नुकसानदायक हो सकती है। डिहाइड्रेशन से किडनी स्टोन और गंभीर स्थिति में अचानक किडनी डैमेज का खतरा बढ़ सकता है। वहीं डॉक्टर की सलाह के बिना पेनकिलर, विशेषकर NSAIDs, तथा अनियंत्रित हर्बल या डाइटरी सप्लीमेंट्स का सेवन भी किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।

इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
आंखों या टखनों के आसपास सूजन, लगातार थकान, झागदार या गहरे रंग का पेशाब, पेशाब की मात्रा कम होना, सांस लेने में परेशानी और बिना कारण जी मिचलाना किडनी संबंधी समस्या के चेतावनी संकेत हो सकते हैं। हालांकि कई मामलों में लक्षण सामने आने से पहले ही किडनी की कार्यक्षमता काफी प्रभावित हो चुकी होती है।
डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, परिवार में किडनी रोग का इतिहास, बार-बार किडनी स्टोन या यूरिन इंफेक्शन की समस्या वाले युवाओं को डॉक्टर की सलाह से किडनी स्क्रीनिंग करानी चाहिए। इसमें ब्लड प्रेशर, किडनी फंक्शन के लिए ब्लड टेस्ट और यूरिन में प्रोटीन या ब्लड की जांच शामिल हो सकती है।
विशेषज्ञों ने युवाओं को वजन नियंत्रित रखने, नियमित शारीरिक गतिविधि करने, नमक का सेवन कम करने और ब्लड शुगर व ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने की सलाह दी है। गर्म मौसम और अधिक मेहनत के दौरान पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है। हालांकि किडनी, हृदय या लीवर की बीमारी से पीड़ित लोगों को पानी की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही तय करनी चाहिए।

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