
देहरादून 14 अप्रैल। दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड के प्रति खास जुड़ाव एक बार फिर साफ नजर आया। सिर पर ब्रह्मकमल टोपी, भाषण में गढ़वाली-कुमाऊंनी शब्दों का प्रयोग और स्थानीय आस्था स्थलों का उल्लेख—इन सबके जरिए प्रधानमंत्री ने अपने चिर-परिचित अंदाज में प्रदेशवासियों से सीधा संवाद स्थापित किया।
अपने संबोधन की शुरुआत में ही प्रधानमंत्री ने “भुला-भुलियों”, “सयाणा”, “आमा”, “बाबा” जैसे पहाड़ी बोली-भाषा के शब्दों का प्रयोग कर लोगों का दिल जीत लिया। यही नहीं, उन्होंने एक्सप्रेस-वे निर्माण में मां डाटकाली के आशीर्वाद का उल्लेख करते हुए देहरादून पर उनकी कृपा का जिक्र किया। साथ ही संतला माता मंदिर, हरिद्वार कुंभ, नंदा राजजात, पंच बदरी, पंच केदार और पंच प्रयाग जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का प्रभावपूर्ण उल्लेख कर अपने भाषण को स्थानीय रंग दिया।
प्रधानमंत्री का यह लोकल कनेक्ट एक बार फिर कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बना, जिसमें उन्होंने वेशभूषा, भाषा और सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से उत्तराखंड की पहचान को प्रमुखता दी। इससे कार्यक्रम में मौजूद लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बीच मजबूत तालमेल और बॉन्डिंग भी साफ नजर आई। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री को “लोकप्रिय, कर्मठ और युवा” बताते हुए उनकी सराहना की।
वहीं, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के संबोधन के दौरान भी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के बीच बातचीत होती दिखी, जिसमें प्रधानमंत्री धामी की बात को ध्यानपूर्वक सुनते नजर आए। यह दृश्य दोनों नेताओं के बीच बेहतर समन्वय और विश्वास को दर्शाता है।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री का यह अंदाज और स्थानीय जुड़ाव एक बार फिर प्रदेशवासियों के बीच चर्चा का विषय बन गया।








