देहरादून, 26 नवंबर 2025।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के 71वें राष्ट्रीय अधिवेशन के अवसर पर हिंद-की-चादर, धर्म-रक्षा और मानवता के प्रतीक श्री गुरु तेग़ बहादुर जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। गुरुद्वारा शीशगंज साहिब, दिल्ली—जहां गुरु तेग़ बहादुर जी ने सर्वोच्च बलिदान दिया—वहां से एकत्रित किया गया पवित्र जल विशेष सम्मान-यात्रा के रूप में अधिवेशन स्थल तक पहुंचा।
यह जल-कलश दिल्ली से होता हुआ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विभिन्न स्थानों से गुजरा। मार्ग में स्थानीय नागरिकों, श्रद्धालुओं और अभाविप कार्यकर्ताओं ने भक्ति, सम्मान और पूर्ण श्रद्धा के साथ जल-कलश का स्वागत, पूजन और सत्कार किया। देहरादून आगमन पर इसका भव्य स्वागत किया गया।
पवित्र जल-कलश को परेड ग्राउंड में बसाए गए भगवान बिरसा मुंडा नगर के जनरल बिपिन रावत मुख्य सभागार में विधिवत स्थापित किया गया। अधिवेशन स्थल पर जल-कलश की प्रतिष्ठा कार्यक्रम ने गुरु तेग़ बहादुर जी के अविनाशी बलिदान की स्मृति को और अधिक पावन व प्रेरणादायी बना दिया।
अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि गुरु तेग़ बहादुर जी का बलिदान भारत के इतिहास में साहस, आस्था, मानव-धर्म और सत्य की रक्षा का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने कहा,
“गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म, सत्य, मानवीय अधिकारों और भारत की सनातन आत्मा की रक्षा के लिए अपने जीवन का सबसे बड़ा त्याग किया। उनका बलिदान केवल एक समुदाय का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता का मार्गदर्शन है। यह पवित्र जल अधिवेशन में उन मूल्यों—त्याग, सत्य, करुणा और कर्तव्य—का राष्ट्रीय पुनःसंकेत है, जिन पर भारत की सभ्यता आधारित है।”
अभाविप ने इसे युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बताते हुए कहा कि गुरु तेग़ बहादुर जी की शिक्षाएँ और बलिदान राष्ट्र-पुनर्निर्माण, सांस्कृतिक गौरव और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने वाले सद्गुणों का स्मरण कराते हैं।








