नई दिल्ली 12 जुलाई ।भारत का वस्त्र उद्योग टिकाऊ (सस्टेनेबल) और सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश का टेक्सटाइल सेक्टर न केवल अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है, बल्कि लाखों लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहा है।
वस्त्र उद्योग देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 2 प्रतिशत का योगदान देता है और 4.5 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है। भारत में हर वर्ष लगभग 78 लाख टन वस्त्र अपशिष्ट (टेक्सटाइल वेस्ट) उत्पन्न होता है, जिसमें से 70 प्रतिशत से अधिक का पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग), पुन: उपयोग (रीयूज) और अपसाइक्लिंग के माध्यम से उपयोग किया जा रहा है।
सरकार के अनुसार, वस्त्र क्षेत्र से जुड़े सर्कुलर नेटवर्क 40 से 45 लाख लोगों की आजीविका का सहारा बने हुए हैं। टिकाऊ फाइबर उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP), जूट-आईकेयर (Jute-ICARE) और न्यू एज फाइबर मिशन जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
वहीं, पीएम मित्र (PM MITRA), एमएसई-गिफ्ट (MSE-GIFT) और एमएसई-स्पाइस (MSE-SPICE) जैसी पहलें स्वच्छ और सर्कुलर उत्पादन प्रणाली को प्रोत्साहित कर रही हैं। इसके अलावा ईको-मार्क, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के माध्यम से खरीद तथा ट्रेसबिलिटी व्यवस्था से टिकाऊ उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में मदद मिल रही है।
सरकार का अनुमान है कि भारत का टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग उद्योग 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है, जिससे एक लाख नए हरित (ग्रीन) रोजगार सृजित होने की संभावना है।







