कृषि और पशुपालन में तकनीक, विविधीकरण और निवेश से बढ़ेगी किसानों की आय: प्रधानमंत्री

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नई दिल्ली 06 मार्च। प्रधानमंत्री ने कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए तकनीक, फसल विविधीकरण और पशुपालन के वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर देते हुए कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती के साथ पशुपालन और अन्य विकल्पों को भी मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि केवल एक ही फसल पर निर्भर रहना किसानों के लिए जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए सरकार क्रॉप डायवर्सिफिकेशन, प्राकृतिक खेती और दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने जैसे अभियानों पर विशेष ध्यान दे रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पशुपालन क्षेत्र में भी वैज्ञानिक प्रबंधन, बेहतर नस्ल और रोगों की रोकथाम पर विशेष फोकस किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि “वन अर्थ, वन हेल्थ” की सोच के तहत पौधों, पशुओं और मनुष्यों के स्वास्थ्य को एक साथ देखते हुए नीतियां बनाई जा रही हैं। भारत अब वैक्सीन उत्पादन में आत्मनिर्भर हो चुका है और पशुओं को फुट एंड माउथ डिजीज से बचाने के लिए सवा सौ करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज लगाए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत नई तकनीकों का विस्तार किया जा रहा है और पशुपालन से जुड़े किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा भी दी जा रही है। इसके अलावा निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए एनिमल हसबेंड्री इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड शुरू किया गया है।

प्रधानमंत्री ने गोबरधन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि गांवों में पशुओं से निकलने वाले गोबर और अन्य जैविक कचरे का उपयोग कर स्वच्छता के साथ-साथ आय और ऊर्जा उत्पादन के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। इससे दूध के साथ-साथ गोबर से भी आय संभव है और गैस उत्पादन के जरिए ऊर्जा सुरक्षा में भी मदद मिलती है। उन्होंने राज्य सरकारों से इस योजना को प्राथमिकता देने और तेजी से आगे बढ़ाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि कृषि में तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ई-नाम के माध्यम से किसानों को बाजार तक पहुंच आसान हुई है, जबकि एग्रीस्टैक के जरिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। इसके तहत लगभग नौ करोड़ किसानों की किसान आईडी बनाई जा चुकी है और करीब 30 करोड़ भूमि पार्सलों का डिजिटल सर्वे भी किया गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि टेक्नोलॉजी का लाभ तभी मिलेगा जब संस्थाएं उसे अपनाएं और उद्यमी उसके आधार पर नवाचार करें। उन्होंने राज्यों से भी कृषि क्षेत्र में अपने बजट और योजनाओं का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

ग्रामीण विकास के लिए चल रही योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वामित्व योजना, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना और स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक सहायता जैसे प्रयासों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। लखपति दीदी अभियान के तहत अब तक तीन करोड़ ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा चुका है और 2029 तक तीन करोड़ और महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में बड़े स्तर पर स्टोरेज क्षमता बढ़ाने के लिए लाखों गोदाम बनाए जा रहे हैं। साथ ही एग्री-प्रोसेसिंग, सप्लाई चेन, एग्री-टेक, एग्री-फिनटेक और कृषि निर्यात के क्षेत्र में निवेश और नवाचार बढ़ाना समय की मांग है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस दिशा में मिलकर किए गए प्रयासों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी और बजट के लाभ गांव-गांव तक पहुंचेंगे।

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