
80 किलोमीटर क्षेत्र में 36 स्थानों पर होगा सर्वे, पांच जीव समूहों के अध्ययन से तैयार होगा नदी के स्वास्थ्य का डेटाबेस
देहरादून 4 नवंबर। पूर्वी दून घाटी की जीवनरेखा मानी जाने वाली सोंग नदी के पारिस्थितिक स्वास्थ्य का आकलन करने और उसके संरक्षण के लिए स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (सारा) ने महत्वपूर्ण पहल की है। सारा के तहत सोंग नदी क्षेत्र में बायो इंडिकेटर प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके माध्यम से नदी के पानी की गुणवत्ता, नदी किनारे के प्राकृतिक आवास और मानवीय गतिविधियों के प्रभावों का जैविक संकेतकों के आधार पर आकलन किया जाएगा।
भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के पूर्व वरिष्ठ प्राध्यापक एवं वैज्ञानिक ‘जी’ डॉ. वीपी उनियाल के मार्गदर्शन में यह अध्ययन किया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य नदी की वास्तविक पारिस्थितिक स्थिति का पता लगाकर उसके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक आधार तैयार करना है।
पांच जीव समूहों से परखी जाएगी नदी की सेहत
अध्ययन के तहत पांच प्रमुख जीव समूहों को जैविक संकेतक के रूप में शामिल किया गया है। इनमें जलीय मैक्रोइनवर्टेब्रेट्स यानी पानी में पाए जाने वाले छोटे जीव और उनके लार्वा, तितलियां, जंगली मधुमक्खियां, ड्रैगनफ्लाई, डेम्सलफ्लाई और पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां शामिल हैं। ये जीव जल की गुणवत्ता, नदी तट की हरियाली, परागण की स्थिति और आसपास के प्राकृतिक आवासों के स्वास्थ्य की जानकारी देंगे। विशेष रूप से जलीय जीव जल प्रदूषण के प्रति संवेदनशील होते हैं, इसलिए इनके अध्ययन से पानी की गुणवत्ता का आकलन करने में मदद मिलेगी।
80 किलोमीटर क्षेत्र में 36 स्थानों पर होगा सर्वे
परियोजना के तहत सोंग नदी के उद्गम स्थल कद्दूखाल (टिहरी) से लेकर गंगा नदी के संगम स्थल तेहरी फार्म (देहरादून) तक करीब 80 किलोमीटर क्षेत्र का अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए नदी को ऊपरी, मध्य और निचले तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक हिस्से में 12 स्थायी सर्वेक्षण केंद्र बनाए जाएंगे। इस तरह कुल 36 स्थानों पर नमूने एकत्र कर अध्ययन किया जाएगा।
शोध कार्य नवंबर से अप्रैल के बीच दो चरणों में पूरा होगा। इसमें मानसून के बाद और मानसून से पहले की परिस्थितियों का अध्ययन किया जाएगा, ताकि मौसम के अनुसार नदी की पारिस्थितिकी में होने वाले बदलावों को भी समझा जा सके।
सोंग बांध और खनन के प्रभावों का भी होगा आकलन
छह महीने की इस परियोजना के पूरा होने पर सोंग नदी का विस्तृत आधारभूत जैविक आंकड़ा तैयार होगा। इससे प्रस्तावित सोंग बांध, खनन गतिविधियों और तेजी से बढ़ते शहरीकरण का नदी की पारिस्थितिकी पर पड़ने वाला प्रभाव समझने में मदद मिलेगी। अध्ययन से प्राप्त वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर नदी के संरक्षण, पुनर्जीवन और प्रबंधन के लिए प्रभावी नीतियां तैयार की जा सकेंगी।








