संबद्धता शुल्क वसूली पर निजी कॉलेज एसोसिएशन ने जताई आपत्ति

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देहरादून 27 अक्टूबर। निजी कॉलेज एसोसिएशन उत्तराखंड के अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय विश्वविद्यालय महाविद्यालय एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. सुनील अग्रवाल ने श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय द्वारा अशासकीय एवं निजी स्ववित्तपोषित कॉलेजों से संबद्धता विस्तार शुल्क वसूले जाने के आदेश पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने 24 अक्टूबर के आदेश में संबद्धता विस्तार के लिए शुल्क तो निर्धारित कर दिया है, लेकिन संबद्धता विस्तार पत्र जारी करने की कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है।

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि आदेश के अनुसार अशासकीय एवं निजी स्ववित्तपोषित कॉलेजों से पारंपरिक एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रम के लिए प्रति पाठ्यक्रम 5 हजार रुपये प्रक्रिया शुल्क तथा 50 हजार रुपये संबद्धता शुल्क लिया जाएगा। 18 प्रतिशत जीएसटी जोड़ने के बाद यह राशि 59 हजार रुपये प्रति पाठ्यक्रम होगी। यदि किसी कॉलेज में 10 पाठ्यक्रम संचालित हैं तो उसे प्रतिवर्ष 5.90 लाख रुपये जमा करने होंगे। वहीं डिप्लोमा पाठ्यक्रम के लिए प्रति पाठ्यक्रम प्रक्रिया एवं संबद्धता शुल्क जीएसटी सहित 29,500 रुपये निर्धारित किया गया है। राजकीय कॉलेजों के लिए पारंपरिक एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों पर प्रति पाठ्यक्रम प्रतिवर्ष 11,800 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।

उन्होंने कहा कि अधिकांश निजी कॉलेजों को वर्ष 2019 के बाद से संबद्धता विस्तार के पत्र तक प्राप्त नहीं हुए हैं। इसके बावजूद प्रतिवर्ष प्रक्रिया शुल्क, संबद्धता शुल्क और जीएसटी वसूलने का प्रावधान किया जा रहा है। इससे कॉलेजों पर आर्थिक भार बढ़ेगा और उनका संचालन मुश्किल हो जाएगा।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि एक ओर सरकार निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए भूमि के मानकों में कमी करने और पांच करोड़ रुपये की स्थायी विन्यास निधि की बाध्यता समाप्त करने की दिशा में कदम उठा रही है, जबकि दूसरी ओर कॉलेजों के लिए भूमि के मानक पूर्ववत हैं और प्राभूत राशि भी बढ़ाकर 15 से 35 लाख रुपये कर दी गई है। इसके साथ ही अब प्रतिवर्ष संबद्धता शुल्क और उस पर जीएसटी की बाध्यता लगाई जा रही है, जबकि संबद्धता विस्तार पत्र जारी करने की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं है।

उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में कॉलेजों का संचालन करना कठिन होता जा रहा है। निजी कॉलेज एसोसिएशन विश्वविद्यालय के इस आदेश का विरोध करते हुए इसमें पुनर्विचार की मांग करेगा। इस संबंध में एसोसिएशन की ओर से श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के कुलपति, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को पत्र भेजा जा रहा है।

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