
देहरादून 29 अक्टूबर। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की ओर से गुरुवार को गढ़वाली कवि अरविंद ‘प्रकृति प्रेमी’ के नवीनतम काव्य संग्रह ‘प्रकृति अर प्रेरणा’ का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में संग्रह की कविताओं पर चर्चा करते हुए साहित्यकारों ने इसे प्रकृति, पर्यावरण, सामाजिक विसंगतियों और लोकजीवन से जुड़ी संवेदनाओं को स्वर देने वाला संग्रह बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्यिक पत्रिका ‘चिट्ठी-पत्री’ के प्रधान संपादक मदन मोहन डुकलाण ने की। साहित्यकार एवं रंगकर्मी डॉ. नंदकिशोर हटवाल मुख्य अतिथि और गढ़वाली लेखक शांति प्रकाश ‘जिज्ञासु’ विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य क्षेत्रीय भाषाओं के साहित्य को प्रोत्साहित करने और उत्तराखंड की भाषाई एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को बढ़ावा देना रहा।
मदन मोहन डुकलाण ने कहा कि अरविंद ‘प्रकृति प्रेमी’ की कविताएं आशा जगाती हैं और समाज को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। डॉ. नंदकिशोर हटवाल ने कहा कि संग्रह में प्रकृति और पर्यावरण के प्रति प्रेम के साथ अंधविश्वास, सामाजिक अन्याय और कुप्रथाओं के खिलाफ असंतोष भी दिखाई देता है। गढ़वाली मुहावरों और ठेठ स्थानीय शब्दों का प्रयोग कविताओं को लोकजीवन से जोड़ता है।
शांति प्रकाश ‘जिज्ञासु’ ने कहा कि संग्रह की कुछ कविताओं का हिंदी अनुवाद होने से वे व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंच सकती हैं। साहित्यकार शिवदयाल ‘शैलज’ ने समीक्षा करते हुए कहा कि संग्रह की छंदमुक्त और विचारप्रधान कविताएं सामाजिक विसंगतियों, पाखंड और आडंबर पर सवाल उठाती हैं।
संग्रह की भूमिका लिखने वाले डॉ. उमेश चमोला ने कहा कि कविताएं प्रकृति और मनुष्य के संबंधों के साथ सामाजिक कुरीतियों और अंधविश्वास के खिलाफ मुखर स्वर प्रस्तुत करती हैं। डॉ. सत्यानंद बडोनी ने संग्रह की भाषाई विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कवि ने टिरियाली क्षेत्र में प्रचलित रहे कई कम सुनाई देने वाले शब्दों को कविताओं में स्थान देकर गढ़वाली भाषा के शब्द भंडार को समृद्ध करने का प्रयास किया है।
कार्यक्रम का संचालन कवयित्री बीना बेंजवाल ने किया। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों से आए साहित्यकार, लेखक, साहित्यप्रेमी, युवा पाठक और संस्कृतिकर्मी मौजूद रहे। कार्यक्रम में गढ़वाली कविता की वर्तमान दिशा, क्षेत्रीय भाषा के संरक्षण और साहित्य की सामाजिक भूमिका पर भी चर्चा हुई।







