
देहरादून 17 सितंबर। उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र और टोंस नदी के आसपास के हिमालयी परिवेश में रची-बसी फिल्म ‘खूंटा’ 18 सितंबर से सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने जा रही है। फिल्म में पहाड़, नदी, संस्कृति, आस्था और आधुनिक विकास के बीच बदलते रिश्तों को कहानी का आधार बनाया गया है।
फिल्म के निर्माता मुकेश मोदी और लेखक एवं निर्देशक अनुषी शर्मा ने उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि फिल्म की अधिकांश शूटिंग उत्तराखंड में हुई है। कुवाणू गांव, टोंस नदी और आसपास के वास्तविक हिमालयी क्षेत्रों को फिल्म में प्रमुखता से शामिल किया गया है। स्थानीय परिवेश, रहन-सहन, लोक संवेदनाओं और संस्कृति को फिल्म की कहानी का हिस्सा बनाया गया है। फिल्म में उत्तराखंड और हिमाचल के स्थानीय तथा नए कलाकारों ने अभिनय किया है।
‘खूंटा’ की कहानी एक ऐसी स्त्री के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जिसका टोंस नदी से गहरा आध्यात्मिक संबंध है। इसी बीच नदी पर बांध बनाए जाने की बात सामने आती है और कहानी विकास तथा प्रकृति के बीच पैदा होने वाले सवालों को सामने रखती है। फिल्म के माध्यम से यह सवाल उठाया गया है कि विकास की कीमत यदि नदियों, पहाड़ों, पर्यावरण और स्थानीय संस्कृति को चुकानी पड़े तो उसके प्रभाव क्या होंगे।
जौनसार-बावर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं को भी फिल्म में विशेष स्थान दिया गया है। महासू महाराज के प्रति क्षेत्र के लोगों की आस्था कहानी के भावनात्मक पक्ष का महत्वपूर्ण हिस्सा है। फिल्म में प्रकृति, मनुष्य और आस्था के आपसी संबंध को स्थानीय जीवन-पद्धति के माध्यम से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
निर्माताओं के अनुसार, ‘खूंटा’ जौनसार-बावर को केवल फिल्म की शूटिंग के स्थान के रूप में नहीं, बल्कि कहानी के जीवंत हिस्से के रूप में प्रस्तुत करती है। पहाड़ की मिट्टी, टोंस नदी, स्थानीय संस्कृति और यहां की आस्था फिल्म के कथानक से जुड़ी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी यात्रा शुरू करने के बाद अब फिल्म उत्तराखंड के दर्शकों के बीच पहुंच रही है। 18 सितंबर से देहरादून, विकासनगर, पोंटा साहिब और जौनसार-बावर क्षेत्र के दर्शक इसे सिनेमाघरों में देख सकेंगे। फिल्म के निर्माता मुकेश मोदी तथा लेखक एवं निर्देशक अनुषी शर्मा हैं।










