महंगाई के बीच यूपीआई पर शुल्क का फैसला जनता पर नया बोझ : धस्माना

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देहरादून, 16 सितंबर। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं एआईसीसी सदस्य सूर्यकांत धस्माना ने महंगाई और यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महंगाई से पहले ही आम आदमी परेशान है और अब बड़े व्यापारिक यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने का फैसला लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है।

धस्माना ने कहा कि अगस्त में थोक महंगाई दर 9.92 प्रतिशत पहुंच गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अगस्त में ईंधन और बिजली क्षेत्र की थोक महंगाई 22.93 प्रतिशत तथा विनिर्मित उत्पादों की महंगाई 8.37 प्रतिशत रही।

उन्होंने कहा कि खुदरा महंगाई भी अगस्त में बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई, जबकि खाद्य महंगाई 5.95 प्रतिशत रही। ग्रामीण क्षेत्र में खुदरा महंगाई 5.23 प्रतिशत दर्ज की गई।

धस्माना ने कहा कि दूध, चीनी, रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल, दाल और खाद्य तेल जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों का असर आम परिवारों के बजट पर पड़ रहा है। ऐसे समय में डिजिटल भुगतान पर किसी भी प्रकार का शुल्क आम लोगों और छोटे कारोबारियों के लिए चिंता का विषय है।

15 अक्टूबर से बड़े व्यापारिक यूपीआई भुगतान पर शुल्क

धस्माना ने यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित शुल्क का विरोध करते हुए कहा कि 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति से व्यापारी को किए जाने वाले यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू किया जाना है। यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये तक होगा। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह शुल्क ग्राहक के बजाय व्यापारी पर लगाया जाएगा और व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले यूपीआई लेनदेन नि:शुल्क रहेंगे।

उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से शुल्क का भार व्यापारी पर रखने की बात कही जा रही है, लेकिन छोटे कारोबारियों के लिए इसकी व्यावहारिक स्थिति पर सवाल उठते हैं। धस्माना ने सरकार से महंगाई पर नियंत्रण के साथ डिजिटल भुगतान व्यवस्था को आम लोगों के लिए सरल और कम लागत वाली बनाए रखने की मांग की।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस महंगाई और आम जनता से जुड़े आर्थिक मुद्दों को लगातार उठाती रहेगी।

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