
देहरादून 14 सितंबर। वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून में विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा, नवाचार और प्रयोगात्मक अधिगम को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘विज्ञान सेतु- कनेक्टिंग स्टूडेंट्स’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का विषय ‘युवा शिक्षार्थियों में वैज्ञानिक सोच और STEM शिक्षा को बढ़ावा देना’ रहा। इस दौरान विद्यार्थियों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों तथा भविष्य की तकनीकी जरूरतों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ वंदेमातरम और राष्ट्रगान से हुआ। इसके बाद सरस्वती वंदना और दीप प्रज्वलन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, विशिष्ट अतिथि विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. शिव कुमार शर्मा, विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) तृप्ता ठाकुर, यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत, विद्यार्थी विज्ञान आंदोलन के उत्तराखंड क्षेत्र के अध्यक्ष डॉ. केडी पुरोहित, यूकॉस्ट के संयुक्त निदेशक एवं विद्यार्थी विज्ञान आंदोलन के उपाध्यक्ष डॉ. डीपी उनियाल, सचिव डॉ. नरेंद्र सिंह तथा इंडिया स्मार्ट ग्रिड फोरम के चेयरमैन डॉ. रेजी कुमार पिल्लई समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम में डॉ. लोकेश जोशी और डॉ. आशीष रतूड़ी ने विद्यार्थी विज्ञान आंदोलन और विद्यार्थी विज्ञान मंथन की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा और तार्किक सोच विकसित करने में भौतिकी ओलंपियाड तथा वैज्ञानिक अधिगम की भूमिका बताई। साथ ही प्रयोगात्मक एवं व्यवहारिक शिक्षा के माध्यम से जिज्ञासा को क्षमता में बदलने पर जोर दिया।
डॉ. डीपी उनियाल ने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार और करियर के अवसरों की जानकारी विद्यार्थियों को दी। डॉ. केडी पुरोहित ने मूलभूत विज्ञान और वैज्ञानिक प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति को जरूरी बताते हुए विद्युत चुंबकीय तरंगों और स्पेक्ट्रम जैसे विषयों की समझ विकसित करने पर जोर दिया।
यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्र में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने देहरादून और प्रदेश में कार्यरत वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों के महत्व को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों, वैज्ञानिक संस्थानों और समाज के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई। उन्होंने उभरती प्रौद्योगिकियों और नवाचार के कारण तेजी से बदल रहे तकनीकी परिवेश के अनुरूप युवाओं को तैयार करने पर जोर दिया।
कुलपति प्रो. (डॉ.) तृप्ता ठाकुर ने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और कौशल विकास की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने नशामुक्त युवा को सशक्त और विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला बताते हुए उपस्थित लोगों से नशामुक्ति और विकसित भारत के संकल्प की शपथ लेने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक, तकनीकी और कौशल विकास से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
डॉ. शिव कुमार शर्मा ने विज्ञान सीखने में जिज्ञासा, प्रश्न करने की प्रवृत्ति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को सार्थक प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित करने में शिक्षकों और मार्गदर्शकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। वहीं डॉ. रेजी कुमार पिल्लई ने विकसित भारत के निर्माण में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर विचार रखे।
मुख्य अतिथि डॉ. धन सिंह रावत ने सम्मानित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए विज्ञान सेतु कार्यक्रम में अधिक से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने विकसित भारत की परिकल्पना से जुड़े कार्यक्रमों में युवाओं की सक्रिय सहभागिता को जरूरी बताया। उन्होंने विद्यालयों और महाविद्यालयों को निबंध लेखन, प्रदर्शनियों और अन्य विकासात्मक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही नशामुक्त अभियान और युवा जागरूकता को विशेष महत्व देते हुए उत्तराखंड और देश के विकास में विद्यार्थियों की सक्रिय भूमिका पर जोर दिया।
कार्यक्रम का महत्वपूर्ण आकर्षण इंडिया स्मार्ट ग्रिड फोरम और वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर रहा। समझौते का उद्देश्य प्रौद्योगिकी, नवाचार और भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं से जुड़े क्षेत्रों में दोनों संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करना है। कार्यक्रम के अंत में डॉ. डीपी उनियाल ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया ।







