
देहरादून/नई दिल्ली, 5 अगस्त। विश्व संस्कृत दिवस से पहले उत्तराखंड सरकार ने संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक प्रसार की दिशा में नई पहल की है। संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने नई दिल्ली स्थित इंडोनेशिया गणराज्य के दूतावास में कार्यवाहक राजदूत युधो सासोंगको से शिष्टाचार भेंट कर दोनों देशों के बीच शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
बैठक में उत्तराखंड में संस्कृत को दूसरी राजभाषा का दर्जा दिए जाने, संस्कृत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयासों तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में संस्कृत को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य के सभी 13 जनपदों में एक-एक संस्कृत ग्राम स्थापित किया गया है, जहां स्थानीय समुदायों को संस्कृत सीखने और भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। साथ ही, उत्तराखंड में संस्कृत आयोग के गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इस संबंध में 10 अगस्त तक देशभर से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।बैठक में इंडोनेशिया के विश्वविद्यालयों और उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय तथा उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम के बीच संस्कृत, भारतीय ज्ञान प्रणाली और सांस्कृतिक अध्ययन के क्षेत्र में समझौता ज्ञापन (एमओयू) करने का प्रस्ताव भी रखा गया।
सचिव दीपक कुमार ने कहा कि इंडोनेशियाई भाषा में आज भी बड़ी संख्या में संस्कृत मूल के शब्द प्रचलित हैं, जो दोनों देशों के प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों का प्रमाण हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस सहयोग से संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक प्रसार को नई गति मिलेगी।








