
देहरादून, 29 अप्रैल। उत्तराखंड में पंचायत चुनावों के दौरान मतदाता सूची में एक ही व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में दर्ज होने के मामलों ने विवाद को गहरा दिया है। हालिया समाचारों में ऐसे मामलों से निर्वाचनों के निरस्त होने के उदाहरण सामने आने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं।
डॉ. शक्ति सिंह बर्थवाल ने प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने याचिका संख्या WPMB No. 503/2025 पर 11 जुलाई 2025 को आदेश जारी कर राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया था। इसमें कहा गया कि यदि किसी व्यक्ति का नाम दो निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में पाया जाए, तो उसके नामांकन पत्रों की ठोस जांच कर उत्तराखंड पंचायतीराज अधिनियम-2016 (यथासंशोधित 2019) के तहत कार्रवाई की जाए।
उन्होंने जनपद नैनीताल के धारी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत भद्रेड़ा का उदाहरण दिया, जहां ग्राम प्रधान आशा मटियाली का निर्वाचन निरस्त कर दिया गया। जांच में उनका नाम दो अलग-अलग स्थानों की मतदाता सूची में दर्ज पाया गया। एसडीएम धारी द्वारा जांच सही ठहराए जाने के बाद उन्हें पद से हटाया गया और दूसरे स्थान पर रहे प्रत्याशी को प्रधान घोषित करने के निर्देश दिए गए। इसी तरह, जनपद चम्पावत की रीठाबुग्गा सीट से निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य भुमान जोशी का भी निर्वाचन निरस्त हो गया, क्योंकि उनका नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज था। न्यायालय के आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई।
प्रेस वार्ता में बताया गया कि उत्तराखंड की जिला अदालतों में सैकड़ों चुनावी शिकायतें लंबित हैं। हाईकोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय के बावजूद इनमें अपेक्षित गति नहीं आ पाई है। संबंधित पक्ष हाईकोर्ट की शरण में जाने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि 11 जुलाई 2025 के आदेश को प्रभावी ढंग से लागू कराया जा सके और लंबित मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो। डॉ. बर्थवाल ने कहा, “लोकतंत्र की नींव पारदर्शिता और निष्पक्षता पर टिकी है। जब मतदाता सूची संदिग्ध हो जाए, तो चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आयोग ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो कोर्ट की अवमानना याचिका दायर की जाएगी।






