
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह समर्पित हैं और इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए। विधानसभा के विशेष सत्र में ‘नारी सम्मान- लोकतंत्र में अधिकार’ विषय पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में सत्ता संभालते ही नारी सशक्तिकरण को शासन की प्राथमिकता बनाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में जेंडर बजट में पांच गुना से अधिक वृद्धि हुई है। वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में महिलाओं और बालिकाओं के कल्याण के लिए 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान से लिंगानुपात और बालिका शिक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। महिला-पुरुष लिंगानुपात में 12 अंकों की वृद्धि हुई है, जबकि माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं का नामांकन 3 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है। संस्थागत प्रसव 61 प्रतिशत से बढ़कर 97 प्रतिशत तक पहुंचा है।
उन्होंने बताया कि ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ के तहत 4 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें 3.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक जमा हैं। ‘प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना’ और ‘स्वच्छ भारत मिशन’ जैसी योजनाओं से महिलाओं के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान को मजबूती मिली है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाकर मुस्लिम महिलाओं को कुप्रथा से मुक्ति दिलाई। उन्होंने कहा कि आज सामान्य परिवारों की बेटियां रसोई से रायसीना हिल तक पहुंच रही हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, विंग कमांडर व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया कुरैशी इसका उदाहरण हैं।
उन्होंने विपक्ष पर महिला आरक्षण को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि परिसीमन के बाद उत्तराखंड विधानसभा की सीटें 105 तक हो सकती थीं, जिनमें 35 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती थीं। सांसदों की संख्या भी 5 से बढ़कर 7 या 8 हो सकती थी, जिससे प्रदेश को लाभ मिलता। उन्होंने कहा कि यदि सामान्य परिवारों की महिलाएं राजनीति में आएंगी तो वंशवादी राजनीति खत्म होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा that प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौजूदा मंत्रिमंडल में 7 महिला मंत्री हैं, जबकि पूर्व प्रधानमंत्रियों के मंत्रिमंडल में महिलाओं की संख्या बेहद सीमित थी।
प्रदेश सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में इस वर्ष जेंडर बजट के तहत करीब 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष से 16 प्रतिशत अधिक है। ‘उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन’, ‘सशक्त बहना उत्सव योजना’ और ‘मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना’ के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण और ‘एकल महिला स्वरोजगार योजना’ के तहत 2 लाख रुपये तक की सहायता दी जा रही है। राज्य में 2 लाख 65 हजार से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। सरकारी सेवाओं में महिलाओं को 30 प्रतिशत और सहकारी समितियों में 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। लोहाघाट में 256 करोड़ रुपये की लागत से राज्य का पहला महिला स्पोर्ट्स कॉलेज भी बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की गई है। इससे मुस्लिम महिलाओं को हलाला, इद्दत, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से राहत मिली है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार दिलाने का संकल्प भी अवश्य पूरा होगा।
अंत में मुख्यमंत्री ने विपक्ष से अपील की कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सकारात्मक भूमिका निभाई जाए।




