देहरादून। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर बीकेटीसी के उपाध्यक्ष एवं दर्जाधारी राज्यमंत्री विजय कपरवाण पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
नेगी का आरोप है कि प्रसिद्ध धार्मिक संस्थान बीकेटीसी, जहां बदरीनाथ और केदारनाथ धामों की यात्रा व्यवस्था की जिम्मेदारी है, वहां व्यवस्था सुधारने के बजाय श्रद्धालुओं के दान-चढ़ावे के धन के दुरुपयोग का खेल चल रहा है।
उन्होंने बताया कि शासनादेश के अनुसार विभिन्न निगमों और बोर्डों में तैनात दायित्वधारियों को सरकारी कार्मिक उपलब्ध न होने की स्थिति में एक वैयक्तिक सहायक और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी निजी स्तर पर रखने की अनुमति होती है। इसके तहत वैयक्तिक सहायक को 15 हजार रुपये और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को 12 हजार रुपये प्रतिमाह भुगतान का प्रावधान है।आरोप है कि विजय कपरवाण ने बीकेटीसी में पर्याप्त अस्थायी कर्मचारी होने के बावजूद अपने पड़ोस के एक युवक को वैयक्तिक सहायक दिखाया, जबकि अपनी पत्नी को ही अपने साथ अनुचर (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी) दर्शाकर 12 हजार रुपये प्रतिमाह का भुगतान लिया जा रहा है।इसके अलावा नेगी ने आरोप लगाया कि शासन द्वारा कार्यालय और आवास उपलब्ध न होने की दशा में 25 हजार रुपये प्रतिमाह भत्ते का प्रावधान है। जबकि बीकेटीसी का मुख्यालय जोशीमठ और कैंप कार्यालय देहरादून में है तथा देहरादून कार्यालय में उपाध्यक्ष को कक्ष भी आवंटित है। इसके बावजूद विजय कपरवाण द्वारा अपना कार्यालय और आवास रुद्रप्रयाग में दर्शाकर प्रतिमाह 25 हजार रुपये भत्ता लिया जा रहा है।नेगी का कहना है कि कार्यालय और आवास की व्यवस्था मुख्यालय अथवा कैंप कार्यालय वाले स्थान पर ही हो सकती है, लेकिन उपाध्यक्ष ने अपने गृह नगर रुद्रप्रयाग में कार्यालय और आवास दर्शाया है। यहां तक कि कार्यालय का फर्नीचर भी बीकेटीसी के धन से खरीदे जाने का आरोप है।
उन्होंने कहा कि बीकेटीसी द्वारा मंदिर समिति एक्ट और शासनादेशों की अनदेखी कर लगातार भुगतान किया जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता ने प्रदेश सरकार से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।





