उत्तराखंड में अपनाया जाएगा गुजरात का सहकारिता मॉडल: डॉ. धन सिंह रावत

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अन्न भंडारण, पारदर्शी क्रेडिट प्रणाली और डिजिटल विस्तार पर रहेगा विशेष फोकस
गुजरात/देहरादून, 18 फरवरी 2026।
सूबे के सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत ने अपने गुजरात प्रवास के दौरान गांधीनगर में सहकारिता से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण संस्थानों का दौरा कर उनके कार्यकलापों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अन्न भंडारण व्यवस्था, बैंकिंग प्रणाली, डिजिटल विस्तार और किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण से संबंधित योजनाओं की जानकारी अधिकारियों से ली।
मीडिया को जारी बयान में डॉ. रावत ने कहा कि उत्तराखंड में सहकारिता क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए गुजरात के सफल मॉडल को अपनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में सहकारी संघों, बैंकों और समितियों में आधुनिक प्रबंधन प्रणाली, वैज्ञानिक अन्न भंडारण, पारदर्शी क्रेडिट व्यवस्था और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे।
आधुनिक अन्न भंडारण व्यवस्था का निरीक्षण
गुजरात प्रवास के दौरान डॉ. रावत ने गांधीनगर स्थित सरढव सेवा सहकारी मंडली लिमिटेड के पीएम श्री अन्न भंडारण केंद्र का निरीक्षण किया। उन्होंने वैज्ञानिक एवं सुरक्षित भंडारण प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की व्यवस्था किसानों की उपज को सुरक्षित रखने और खाद्यान्न की गुणवत्ता बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इसे किसानों की आय वृद्धि और खाद्य सुरक्षा के लिए प्रभावी मॉडल बताया।
वित्तीय एवं क्रेडिट प्रणाली की समीक्षा
डॉ. रावत ने गांधीनगर जिला सहकारी संघ तथा जिला सहकारी ऋण समिति लिमिटेड का भी दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पारदर्शी प्रबंधन, क्रेडिट प्रणाली और वित्तीय समावेशन की योजनाओं की विस्तृत जानकारी ली।
अपने भ्रमण के दौरान उन्होंने जिला सहकारी संघ गांधीनगर के अध्यक्ष कोदरभाई आर पेटल से मुलाकात कर सहकारिता के विभिन्न आयामों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की। डॉ. रावत ने उत्तराखंड में संचालित सहकारी योजनाओं की जानकारी भी साझा की।
डॉ. रावत ने कहा कि सहकारिता सामाजिक समरसता, सामूहिक भागीदारी और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम है। गुजरात के प्रेरणादायी अनुभवों से सीख लेकर उत्तराखंड में सहकारिता आंदोलन को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाया जाएगा, जिससे ग्रामीण विकास, वित्तीय समावेशन और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के लक्ष्य को नई मजबूती मिलेगी।

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