देहरादून से उठा संस्कृति और संस्कारों का शंखनाद

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मातृशक्ति को सीएम धामी का नमन
देहरादून 17 फरवरी। पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, पटेल नगर में विश्वमांगल्य सभा के तत्वावधान में आयोजित ‘मातृ संस्कार समागम’ में प्रतिभाग करते हुए मातृशक्ति को राष्ट्र निर्माण की धुरी बताया। उन्होंने कहा कि “मजबूत परिवार ही मजबूत राष्ट्र की आधारशिला है” और परिवार ही वह प्रथम विद्यालय है, जहां से राष्ट्र का चरित्र गढ़ा जाता है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आई माताओं और बहनों का अभिनंदन करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में माता का स्थान सर्वोच्च है। उन्होंने अपने बचपन और निजी जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनका जीवन संघर्ष, अनुशासन और संस्कारों की पूंजी से बना है। साधारण परिवार में पले-बढ़े होने के कारण उन्होंने मेहनत, ईमानदारी और आत्मनिर्भरता का महत्व सीखा, जो आज भी उनके निर्णयों की आधारशिला है।
उन्होंने कहा कि आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन स्थापित करना समय की आवश्यकता है। संयुक्त परिवार व्यवस्था के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने ‘कुटुंब प्रबोधन’ को सामाजिक परिवर्तन का मंत्र बताया। उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली और बढ़ती व्यस्तता के कारण परिवारों में संवाद कम हुआ है, ऐसे में त्याग, सहयोग और भावनात्मक जुड़ाव जैसे मूल्यों को पुनर्जीवित करना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने भारतीय इतिहास और परंपरा के उदाहरण देते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम को माता कौशल्या, भगवान श्रीकृष्ण को माता यशोदा और छत्रपति शिवाजी महाराज को माता जीजाबाई से मिले संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व को महान बनाया। मातृसंस्कार ही व्यक्ति के चरित्र, विचार और व्यवहार की नींव रखते हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में इस प्रकार के आयोजन सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण का माध्यम बन रहे हैं। विश्वमांगल्य सभा के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह वैचारिक संवाद मातृशक्ति को नई ऊर्जा देगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गीता धामी ने कहा कि सेवा ही जीवन का मूल है। उन्होंने ‘सेवा परमो धर्मः’ की भावना को जीवन में उतारने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि परिवार ही पहली पाठशाला है, जहां से बच्चे संवेदना, सहयोग और सामाजिक उत्तरदायित्व सीखते हैं। यदि प्रत्येक परिवार सेवा को संस्कार बना ले, तो समाज में करुणा और समरसता स्वतः बढ़ेगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘सप्त मातृ शक्ति सम्मान’ के तहत विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली सात महिलाओं ममता राणा, ममता रावत, शैला ब्रिजनाथ, साध्वी कमलेश भारती, राजरानी अग्रवाल, मंजू टम्टा एवं कविता मलासी—को सम्मानित किया।
कार्यक्रम में विश्वमांगल्य सभा के पदाधिकारी, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में मातृशक्ति उपस्थित रही। समागम में सेवा, समर्पण और संस्कार का संदेश गूंजा और मजबूत परिवार के माध्यम से सशक्त राष्ट्र निर्माण का संकल्प दोहराया गया।

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