बच्चों के लिए आयुर्वेद में बेहतर इलाज : डॉ. रिजु सुखम आयुर्वेदिक हॉस्पिटल में शुरू हुई आयुर्वेदिक चाइल्ड स्पेशलिस्ट की सुविधा

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

बच्चों के लिए आयुर्वेद में बेहतर इलाज : डॉ. रिजु

सुखम आयुर्वेदिक हॉस्पिटल में शुरू हुई आयुर्वेदिक चाइल्ड स्पेशलिस्ट की सुविधा

देहरादून। नारायण दत्त भट्ट।19 जुलाई।
सुखम अस्पताल के संचालक डॉ. रिजु कुमार ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद काफी बेहतर होता है, क्योंकि यह बिना किसी साइड इफेक्ट के आपके बच्चे को स्वस्थ रखता है। आयुर्वेद में हर बीमारी का इलाज है।
हरिद्वार बाईपास रोड स्थित अस्पताल में पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए डॉ. रिजु कुमार ने आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को स्वास्थ्य के लिए काफी बेहतर बताते हुए कहा कि देहरादून में सुखम हॉस्पिटल पहला ऐसा अस्पताल होगा जहां पर आयुर्वेदिक चाइल्ड स्पेशलिस्ट सुविधा की सुविधा प्रारंभ हो रही है। जिसमें आयुर्वेदिक नवजात शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नीरज श्रीवास्तव शाम की ओपीडी में अपनी सेवाएं देंगे। डॉ. नीरज श्रीवास्तव ने बीएएमएस वनारस हिंदू
यूनिवर्सिटी तथा सीनियर रेजिडेंसी, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में डिग्रियां हासिल की है I डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि बालकों में होने वाले कई रोगों का इलाज आयुर्वेद के द्वारा बिना किसी साइड इफेक्ट के संभव है। जहां एलोपैथिक मेडिसिन बच्चों के लीवर और किडनी पर साइड इफेक्ट डालते हैं, वहीं पर हम आयुर्वेद मे हर्बल मेडिसिस तथा पंचकर्म के द्वारा अधिकतर रोगों को बिना साइड इफेक्ट के उपचार ले सकते है । बच्चों की
न्यूरोलॉजिकल बीमारियां जैसे सेरेब्रल पाल्सी,ऑटिज्म, बेड वेटिंग, त्वचा से संबंधित बीमारी विटिलिगो, स्किन एलर्जी, फंगल इन्फेक्शन, शरीर पर दाने,एंडोक्राइन डिसऑर्डर जैसे टाइप 1 डायबिटीज, हाइपोथायरायडिज्म, मोटापा , सांस से संबंधित बीमारियां निमोनिया, अस्थमा, सर्दी, खांसी, एलर्जी इत्यादि, पेट से संबंधित बीमारी जैसे डायरिया, भूख कम लगना, बार-बार पेट में दर्द होना, खाने का सही से पाचन न होना, बच्चों में किडनी से संबंधित बीमारियां जैसे नेफ्रोटिक सिंड्रोम, नेफ्राइटिस इत्यादि का महीने में हर पुष्य नक्षत्र पर बच्चों का स्वर्ण प्रासन कराया जाएगा, जो आयुर्वेद के अनुसार बच्चों में प्रतिरोध क्षमता, मेमोरी तथा पाचनतंत्र को विकसित करता है। उन्होंने कहा कि जुवेनाइल अर्थराइटिस, पढ़ाई में कमजोर होना, एनीमिया, जोडिस कंप्यूटर विन सिंड्रोम, वजन व लंबाई का उचित रूप से न बढ़ना इत्यादि का आयुर्वेदिक इलाज लिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सुखम में आयुर्वेदिक स्त्री रोग विशेषज्ञ की भी सेवाएं मिलेंगी।
डॉ. रिजु कुमार ने बताया कि सुखम हॉस्पिटल में आयुर्वेदिक योग विशेषज्ञ भी अपनी सेवाएं देगी। उन्होंने बताया कि सुखम हॉस्पिटल पहला ऐसा अस्पताल होगा, जहां पर यह सुविधा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि स्त्रीरोग संबंधी इन बीमारियों पीसीओडी (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) आयुर्वेदिक उपचार हार्मोन संतुलन, वजन प्रबंधन और कम करता है । बांझपन प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए जड़ी-बूटियों, आहार और जीवनशैली में बदलाव कर इलाज जाता है। मासिक धर्म संबंधी विकार आयुर्वेदिक इलाज के जरिए अनियमित मासिक धर्म, भारी रक्तस्रा, दर्दनाक मासिक धर्म आदि समस्या का समाधान किया जाता है। एंडोमेट्रियोसिस आयुर्वेदिक में सूजन को कम करना, हार्मोन को संतुलित करना और समग्र स्वास्थ्य में सुधार करना शामिल है।
फाइब्रॉएड ट्यूमर के आकार को कम करना, लक्षणों को कम करना और गर्भाशय के समग्र सुधार करना है।
ल्यूकोरिया श्वेत प्रदर के समाधान के लिए हर्बल इलाज और आहार परिवर्तन के जरिए उपच जाता है। वैजिनाइटिस आयुर्वेदिक इलाज के जरिए सूजन, खुजली और संक्रमण को कम किया जाता है।
गर्भाशय ग्रीवाशोथ आयुर्वेदिक में सूजन को कम करना और गर्भाशय ग्रीवा के स्वास्थ्य में सुभ शामिल है। प्रीमेस्टुअल सिंड्रोम (पीएमएस)आयुर्वेदिक उपचार में मूड स्विंग, सूजन जैसे लक्षणों को कम है।
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

Leave a Comment

और पढ़ें