ठंड के मौसम में गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत: चिकित्सकीय परामर्श

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चम्पावत, 06 जनवरी ।
ठंड के मौसम में गर्भावस्था के दौरान माँ और गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य को लेकर अतिरिक्त सतर्कता आवश्यक है। जिला चिकित्सालय चम्पावत में तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मिनिका गिरी एवं डॉ. अभिषेक ने गर्भवती महिलाओं के लिए आवश्यक “क्या करें और क्या न करें” संबंधी महत्वपूर्ण चिकित्सकीय परामर्श साझा किए।

चिकित्सकों ने बताया कि गर्भवती महिलाएं स्वयं को ठंड से अवश्य बचाएँ, लेकिन अत्यधिक कपड़े पहनने से बचें। सामान्य रूप से 3 से 4 लेयर कपड़े पर्याप्त होते हैं। उन्होंने प्रतिदिन ढाई से तीन लीटर पानी पीने की सलाह दी, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो और यूरिन संक्रमण से बचाव हो सके।

डॉक्टरों ने संतुलित और पौष्टिक आहार लेने पर जोर देते हुए कहा कि गर्भावस्था में हाई प्रोटीन और हाई कैलोरी की आवश्यकता बढ़ जाती है। केवल घरेलू भोजन से पूर्ति न होने पर डॉक्टर की सलाह से पोषण सप्लीमेंट लिया जा सकता है।

ठंड के मौसम में त्वचा के रूखेपन और पेट पर स्ट्रेच मार्क्स की समस्या से बचाव के लिए बॉडी नरिशिंग क्रीम या नारियल तेल के उपयोग की सलाह दी गई। इसके साथ ही प्रतिदिन 9 से 10 घंटे की पर्याप्त नींद लेने तथा 28–30 सप्ताह के बाद सीधे न सोकर बाईं करवट सोने को बेहतर बताया गया, जिससे शिशु में रक्त प्रवाह और मूवमेंट ठीक रहती है।

डॉ. मिनिका गिरी ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को शिशु की मूवमेंट पर विशेष ध्यान देना चाहिए। 24 घंटे में 10 से 12 बार मूवमेंट सामान्य मानी जाती है। इससे कम होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाँच करानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि कोई भी टीकाकरण लंबित न रखें। टिटनेस सहित सभी सरकारी टीके समय पर लगवाएँ तथा डॉक्टर की सलाह से इन्फ्लुएंजा जैसी अतिरिक्त वैक्सीन भी ली जा सकती है।

चिकित्सकों ने अत्यधिक ठंड और अत्यधिक गर्मी दोनों से बचने की सलाह दी। ठंडे पानी से स्नान न करें और न ही बहुत गर्म पानी का प्रयोग करें। खांसी, जुकाम या बुखार को नजरअंदाज न करें और यदि तापमान 100 डिग्री फॉरेनहाइट से अधिक हो तो तुरंत स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।

उन्होंने यह भी चेताया कि अदरक या अजवाइन का अत्यधिक सेवन न करें, क्योंकि इससे पेट में जलन हो सकती है। घर में उचित वेंटिलेशन रखें, बिना हवा के लंबे समय तक हीटर न चलाएँ और यदि परिवार में किसी को सर्दी-जुकाम हो तो दूरी बनाए रखें या मास्क का उपयोग करें।

सर्दियों में धूप कम मिलने से विटामिन-डी की कमी हो सकती है, ऐसे में डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लेने की आवश्यकता हो सकती है। नहाते समय बाथरूम में एंटी-स्लिप फुटवेयर पहनने की सलाह भी दी गई, ताकि फिसलने से दुर्घटना न हो।

चिकित्सकों ने बताया कि यदि लगातार बुखार, शिशु की मूवमेंट में कमी, सांस लेने में परेशानी, जोड़ों में दर्द या यूरिन संक्रमण जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करना चाहिए।

 

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