
देहरादून, 02 मई 2026। प्रदेश में भूमि धोखाधड़ी के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में आयोजित लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की बैठक में 125 मामलों की सुनवाई की गई, जिनमें से 45 का निस्तारण कर दिया गया, जबकि 24 गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
सर्वे चौक स्थित कैंप कार्यालय में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में 20 लंबित और 105 नए मामलों की समीक्षा की गई। नए मामलों में सर्वाधिक 74 मामले देहरादून जिले से सामने आए, जबकि हरिद्वार के 15, पौड़ी के 13, टिहरी के 2 और चमोली का 1 मामला शामिल है।आयुक्त ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत भूमि फर्जीवाड़े को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी मामलों का त्वरित और प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए तथा जिन प्रकरणों में संयुक्त निरीक्षण आवश्यक है, उन्हें सप्ताह भर में पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।सुनवाई के दौरान कई चौंकाने वाले फर्जीवाड़े उजागर हुए। कहीं बिना जमीन के ही बिक्री कर दी गई, तो कहीं खसरा नंबर में हेरफेर कर दूसरी जमीन दिखा दी गई। कुछ मामलों में 2 बीघा जमीन को 4 बीघा बताकर बेचने जैसे गंभीर धोखाधड़ी के मामले सामने आए। आयुक्त ने पुलिस को ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
24 गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश के साथ ही 13 शिकायतें विशेष रूप से अवैध कब्जा, तारबाड़ कर जमीन हड़पने और भूमि को नुकसान पहुंचाने से जुड़ी पाई गईं। इसके अलावा अन्य 11 मामलों में भी धोखाधड़ी और अवैध कब्जे के आरोप सामने आए हैं।बैठक में यह भी सामने आया कि 45 मामलों का निस्तारण आपसी समझौते, धन वापसी और प्रशासनिक हस्तक्षेप से संभव हुआ। वहीं कुछ प्रकरण सिविल न्यायालय में लंबित पाए गए, जिनमें लैंड फ्रॉड नहीं पाया गया।
आयुक्त ने बड़े भू-प्रकरणों में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को 15 दिन के भीतर ठोस प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्पष्ट भूमि धोखाधड़ी के मामलों में अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए और जो मामले धोखाधड़ी से संबंधित नहीं हैं, उनकी जानकारी शिकायतकर्ताओं को दी जाए।आयुक्त ने निर्देश दिए कि भूमि विवादों की प्रारंभिक स्तर पर ही पहचान कर आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में बड़े विवादों से बचा जा सके। साथ ही न्यायालय में लंबित मामलों को छोड़कर अन्य सभी मामलों में विभागीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।






