
डीएम बोले— बच्चों के हाथ में कटोरा नहीं, सिर्फ कलम होनी चाहिए
देहरादून में 7 बाल श्रमिक रेस्क्यू, 7 प्रतिष्ठानों के खिलाफ एफआईआर
देहरादून, 25 नवंबर। बच्चों से उनका बचपन और शिक्षा छीनने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। यह चेतावनी जिलाधिकारी सविन बंसल ने सोमवार को जनपद में चलाए गए व्यापक बाल श्रम उन्मूलन अभियान के बाद दी। अभियान के दौरान विकासनगर, पटेलनगर और सहसपुर थाना क्षेत्रों में चलाए गए संयुक्त अभियान में 7 बाल श्रमिकों को रेस्क्यू किया गया और 7 प्रतिष्ठानों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई।
जिलाधिकारी के निर्देश पर श्रम विभाग, पुलिस विभाग, डीटीएफ टीम, बाल विकास विभाग और गैर सरकारी संगठन बचपन बचाओ आंदोलन सहित संबंधित एजेंसियों की संयुक्त टीमों ने सुबह से ही छापेमारी शुरू की। होटल, ढाबों, वर्कशॉप, बाजारों, औद्योगिक इकाइयों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में नाबालिग बच्चों की तलाश की गई।
डीएम सविन बंसल ने कहा कि जनपद प्रशासन बाल श्रम के उन्मूलन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “बच्चों के हाथ में भिक्षा का कटोरा या औजार नहीं, केवल कलम होनी चाहिए। बाल श्रम को बढ़ावा देने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। जिले में कोई भी अवैध बाल श्रम गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” उन्होंने समाज से भी अपील की कि बाल श्रम की सूचना तत्काल प्रशासन को दें।
अभियान में थाना विकासनगर क्षेत्र में नौ संस्थानों पर छापेमारी कर दो नाबालिग बच्चों को मै० एबी फैब्रिकेशन और मै० न्यू भारत टायर पंचर से रेस्क्यू किया गया। थाना पटेलनगर क्षेत्र के 12 प्रतिष्ठानों की जांच में तीन बच्चों को मै० दिल्ली ऑटोमोबाइल, मैसर्स सुहेल बॉडी केयर और मै० अख्तर वुड वर्क से मुक्त कराया गया। वहीं थाना सहसपुर क्षेत्र में दो प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कर मै० श्री बालाजी ऑटो रिपेयर पार्ट्स और मै० ब्रदर्स रेस्टोरेंट से दो नाबालिग लड़कों को रेस्क्यू किया गया। कुल 23 छापेमारी में 7 संस्थानों पर बाल श्रमिक पाए गए।
रेस्क्यू किए गए बच्चों का मेडिकल कराकर उन्हें बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) केदारपुरम के समक्ष प्रस्तुत किया गया। उधर बाल श्रम नियंत्रण कानून के तहत सातों प्रतिष्ठान मालिकों के खिलाफ संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज कर दी गई है। प्रशासन का कहना है कि जनपद में बाल श्रम के खिलाफ यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।








