अजमेर में उत्तराखंड धर्मशाला को मिला नया स्वरूप, धामी ने लोकार्पण कर 50 लाख देने की घोषणा की

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अजमेर (राजस्थान) 23 नवंबर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को तीर्थराज पुष्कर स्थित अखिल भारतीय उत्तराखंड धर्मशाला – आश्रम के द्वितीय तल का लोकार्पण किया। विशेष कार्यक्रम में प्रवासी उत्तराखंडी, स्थानीय नागरिक एवं विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आश्रम संचालन समिति को 50 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि देने की घोषणा की। इससे पहले उत्तराखंड सरकार आश्रम निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये की सहायता प्रदान कर चुकी है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने तीर्थराज पुष्कर की पवित्रता को नमन किया और कहा कि “चारधाम यात्रा का पुण्य तभी पूर्ण होता है, जब श्रद्धालु पुष्कर सरोवर में स्नान करें।” उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता ने पुष्कर की आध्यात्मिक महिमा से प्रेरित होकर ही उनका नाम ‘पुष्कर’ रखा। उन्होंने कहा कि यह धर्मशाला प्रवासी उत्तराखंडियों और श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण आश्रय स्थल बनेगी और राजस्थान व उत्तराखंड के बीच सांस्कृतिक व सामाजिक संबंधों को और सुगठित करेगी। उन्होंने कहा कि “मैं राजस्थान में नहीं बल्कि देवभूमि के अपने परिजनों के बीच हूं।”

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का सशक्त दौर चल रहा है। राम मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकाल लोक, केदारनाथ–बद्रीनाथ धामों के पुनर्निर्माण जैसे कार्यों ने भारतीय आध्यात्मिक धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाई है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में भी केदारखंड–मानसखंड मंदिर क्षेत्रों के सौंदर्यीकरण, श्रीकृष्ण यमुना तीर्थ सर्किट, हरिद्वार–ऋषिकेश कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर सहित कई परियोजनाओं पर तेजी से कार्य चल रहा है और दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज की स्थापना इसी दिशा में बड़ा कदम है।

धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक व आध्यात्मिक पहचान की रक्षा के लिए राज्य सरकार ने कठोर कदम उठाए हैं। जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया गया है, लैंड जिहाद व लव जिहाद के मामलों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है, दंगारोधी कानून के तहत दंगाइयों से क्षति की वसूली की जा रही है, सरकारी भूमि पर चिन्हांकन कर 10 हजार एकड़ से अधिक भूमि अवैध कब्जों से मुक्त कराई गई है। देश में पहली बार समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की गई, मदरसा बोर्ड समाप्त किया गया और सभी संस्थानों में सरकारी बोर्ड के मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम अनिवार्य किए गए। 250 से अधिक अवैध मदरसों को बंद किया गया और “ऑपरेशन कालनेमि” के तहत धार्मिक स्थलों पर भेष बदलकर भ्रम फैलाने वाले तत्वों पर सख्त कार्रवाई जारी है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य अलगाववादी सोच नहीं, बल्कि ज्ञान और संस्कार के मंदिर स्थापित करना है।

मुख्यमंत्री ने प्रवासी उत्तराखंडियों से आग्रह किया कि वे जहां भी हों, अपनी संस्कृति, पहचान और पूर्वजों की गौरवशाली परंपरा को गर्व के साथ आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि “हमारा लक्ष्य उत्तराखंड को देश की आध्यात्मिक राजधानी बनाना है और इस अभियान में हर उत्तराखंडी की भूमिका महत्वपूर्ण है।”

कार्यक्रम में ओंकार सिंह लखावत — अध्यक्ष, राजस्थान धरोहर संरक्षण प्राधिकरण एवं वरिष्ठ भाजपा नेता, सुरेश सिंह रावत — मंत्री, राजस्थान सरकार, जिलाधिकारी अजमेर लोकबंधु, अखिल भारतीय उत्तराखंड आश्रम के अध्यक्ष एस. एस. तड़ागी, राजेंद्र व्यास सहित बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखंडी और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे।

 

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