सहकारिता चुनावों में छाया महिला नेतृत्व, 281 समितियों की कमान अब महिलाओं के हाथ में

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2517 महिलाएं संचालक निर्वाचित, 159 बनी उपाध्यक्ष — उत्तराखंड बना देश का पहला राज्य जहां सहकारिता में 33% आरक्षण

देहरादून 22 नवम्बर।
उत्तराखंड के सहकारिता चुनावों में इस बार महिला सशक्तिकरण की दमदार छाप देखने को मिली। प्रदेशभर में संपन्न हुए चुनावों में कुल 668 समितियों में से 281 समितियों की बागडोर महिलाओं के हाथ में आ गई, जबकि 159 समितियों में उपाध्यक्ष पद पर भी महिलाओं ने जीत दर्ज की। सहकारिता के इतिहास में यह सबसे बड़ी संख्या मानी जा रही है।

इतना ही नहीं, विभिन्न समितियों के संचालक मंडल में 2517 महिलाएं निर्वाचित हुई हैं, जो सहकारिता आंदोलन में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व का स्पष्ट संकेत है।

गौरतलब है कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है जहां सहकारिता में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। सरकार के इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद सहकारिता ढांचे में महिला प्रतिनिधित्व मजबूत तरीके से उभरकर सामने आया है।

प्रदेश की 671 एम-पैक्स समितियों में हुए चुनावों के दौरान कुल 6486 संचालक चुने गए, जिनमें लगभग 39 प्रतिशत यानी 2517 महिलाएं विजेता बनीं। सभी जिलों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व उल्लेखनीय रहा — अल्मोड़ा 254, पिथौरागढ़ 281, पौड़ी 382, देहरादून 173, हरिद्वार 191, टिहरी 237 सहित अन्य जिलों में भी महिलाओं का दबदबा देखा गया।

पदाधिकारी स्तर पर भी महिलाओं ने मजबूत उपस्थिति दर्ज की —
अध्यक्ष पद पर सबसे अधिक जीत पौड़ी जिले में (58), उसके बाद पिथौरागढ़ (35) और टिहरी (30) में रही।

महिला नेतृत्व से सहकारिता को नई दिशा

सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने परिणामों को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा —
“महिलाओं की भागीदारी सहकारिता आंदोलन में नई ऊर्जा और गति का संचार करेगी। महिला नेतृत्व से पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और संवेदनशीलता जैसे मूल्य और भी मजबूत होंगे।”

चुनाव परिणामों के बाद सहकारिता क्षेत्र में जिस तरह से महिला नेतृत्व उभरा है, उसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सामुदायिक विकास और महिला सशक्तिकरण के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।

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