मुख्यमंत्री धामी करेंगे सम्मेलन का शुभारंभ, प्रवासियों से होगा सीधा संवाद
देहरादून, 23 अक्तूबर।
राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष में प्रवासी उत्तराखंडी एक बार फिर अपनी मातृभूमि की दिशा और दशा पर मंथन करने जुटेंगे। पांच नवंबर को दून विश्वविद्यालय में दूसरा प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर पिछले वर्ष शुरू हुआ यह सम्मेलन अब एक नियमित वार्षिक परंपरा बन चुका है।
प्रदेश सरकार के अनुसार, इस बार भी सम्मेलन में बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखंडी भाग लेंगे। अब तक उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, झारखंड सहित विभिन्न राज्यों से 200 से अधिक प्रतिभागियों ने अपना पंजीकरण कराया है। पंजीकरण प्रक्रिया 24 अक्तूबर की देर रात तक प्रवासी उत्तराखंड प्रकोष्ठ की वेबसाइट www.pravasiuttarakhandi.uk.gov.in पर जारी रहेगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सुबह 10 बजे दून विश्वविद्यालय के नित्यानंद ऑडिटोरियम में सम्मेलन का शुभारंभ करेंगे। सम्मेलन दो सत्रों में होगा। पहला सत्र पर्यावरण पर केंद्रित रहेगा, जिसके लिए वन विभाग के पीसीसीएफ एसपी सुबुद्धि को नोडल अधिकारी बनाया गया है। दूसरा सत्र स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण विषयों पर आधारित रहेगा, जिसकी जिम्मेदारी दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल को दी गई है।
प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री आर.के. सुधांशु ने बताया कि सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री प्रवासी उत्तराखंडियों से सीधा संवाद भी करेंगे। करीब एक घंटे के इस संवाद सत्र में प्रवासी अपने अनुभव और सुझाव साझा करेंगे। सम्मेलन के समापन पर सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भी किया जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रवासी उत्तराखंडी हमारे राज्य की अमूल्य धरोहर हैं। उन्हें एक मंच पर लाने और विकास यात्रा में उनकी सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने प्रवासियों से अपील की कि वे उत्तराखंड के रजत जयंती वर्ष पर आयोजित इस सम्मेलन में बढ़-चढ़कर भाग लें।
मुख्यमंत्री धामी बोले—
“प्रवासी उत्तराखंडियों के सुझाव हमारे लिए मार्गदर्शक हैं। उनके अनुभवों और विचारों से राज्य के विकास का रोडमैप और अधिक प्रभावी बनेगा। मैं सभी प्रवासी उत्तराखंडियों को इस सम्मेलन में सादर आमंत्रित करता हूं।”








