सिक्का डेवलपर्स को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल

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देहरादून। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सिक्का डेवलपर्स और नोएडा अथॉरिटी से जुड़े मामले को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने आरोप लगाया कि कागजों पर अलग-अलग दिखाई जाने वाली कुछ कंपनियों के निदेशक मूल रूप से एक ही प्रबंधकीय तंत्र या सिंडिकेट से जुड़े हैं। उनका कहना है कि इससे यह संकेत मिलता है कि अलग दिखाई जाने वाली इकाइयां वास्तव में एक ही आंतरिक तंत्र का हिस्सा हैं।

पत्रकार वार्ता में डॉ. प्रतिमा सिंह ने दावा किया कि नोएडा अथॉरिटी ने सिक्का डेवलपर्स के खिलाफ करीब 277 करोड़ रुपये की रिकवरी के आदेश जारी किए हैं। उनके अनुसार, प्राधिकरण की ओर से कंपनी के 31 फ्लैट सील किए जाने के बावजूद करीब 208 करोड़ रुपये की देनदारी अभी शेष है। कांग्रेस ने कंपनी पर वित्तीय अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाते हुए कहा कि उसके खिलाफ देश के अन्य राज्यों में भी गंभीर मामले दर्ज हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता के अनुसार, कंपनी पर भूमि आवंटन से जुड़े अनुबंधों और निर्धारित शर्तों का अनुपालन नहीं करने के आरोप हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में टी-1 के 18,001 वर्ग मीटर और टी-2 के 50,036 वर्ग मीटर के दो प्रमुख भूखंड शामिल थे। नियमों के तहत कंपनियों के लिए अपनी वित्तीय सुदृढ़ता साबित करने के लिए वित्तीय वर्ष 2023-24 का नेटवर्थ प्रमाणपत्र निर्धारित समय पर प्रस्तुत करना जरूरी था, लेकिन आरोप है कि यह प्रमाणपत्र समय पर जमा नहीं किया गया।

डॉ. सिंह ने आरोप लगाया कि सिक्का डेवलपर्स टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी अर्हता पूरी करने में विफल रही, इसके बावजूद उसे वित्तीय बोली के चरण में शामिल किया गया। तकनीकी रूप से अयोग्य होने के बावजूद कंपनी को भूमि का अनंतिम आवंटन किए जाने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 में निहित समानता के अधिकार और टेंडर नियमावली के प्रावधानों का उल्लंघन बताया।

कांग्रेस ने पूरे मामले की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अन्य प्रतिस्पर्धी कंपनियों को दरकिनार कर एक चुनिंदा कॉरपोरेट समूह को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। पार्टी ने इस मामले में प्रशासनिक तंत्र की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग की। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भूमि आवंटन की पूरी प्रक्रिया, कंपनियों की तकनीकी पात्रता, वित्तीय दस्तावेजों और अनंतिम आवंटन से जुड़े निर्णयों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
पत्रकार वार्ता में प्रदेश महामंत्री संगठन राजेंद्र भंडारी और अमरजीत सिंह भी मौजूद रहे।

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