हरिद्वार भूमि खरीद घोटाले में बड़ा एक्शन, 10 लोगों पर मुकदमा दर्ज होगा

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देहरादून 19 जून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के तहत हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में बड़ी कार्रवाई की गई है। विजिलेंस की विस्तृत जांच में भूमि क्रय-विक्रय प्रक्रिया में आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी तथा नगर निगम को आर्थिक क्षति पहुंचाने के आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए हैं।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य सतर्कता समिति की संस्तुति पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले में संलिप्त अधिकारियों, कर्मचारियों और भूमि विक्रेताओं के विरुद्ध अभियोग दर्ज किए जाने को मंजूरी दे दी है। दोषियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया जाएगा उनमें तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी, तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रविन्द्र कुमार दयाल, तत्कालीन कर अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट, तत्कालीन सहायक अभियंता एवं प्रभारी अधिशासी अभियंता आनंद सिंह मिश्राण, तत्कालीन संपत्ति लिपिक वेदपाल तथा तत्कालीन मानचित्रकार दिनेश काण्डपाल शामिल हैं।इसके अलावा भूमि विक्रेता सुमन देवी, जितेन्द्र कुमार, अभिषेक यादव और सुजीत कुमार सिंह के खिलाफ भी अभियोग दर्ज किए जाएंगे।
सरकार ने प्रकरण में तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी को सेवा से बर्खास्त किए जाने की संस्तुति की है। वहीं तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह को अपने दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) लगाए जाने का निर्णय लिया गया है। दोनों अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को प्रस्ताव भेजा जा रहा है।
इसके अतिरिक्त तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह के विरुद्ध परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने तथा उनकी तीन वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं।
गौरतलब है कि भूमि खरीद प्रकरण सामने आने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने तत्काल सख्त रुख अपनाते हुए प्रारंभिक जांच के आधार पर तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी सहित कई अधिकारियों को निलंबित किया था। इसके बाद विशेष जांच और ऑडिट के माध्यम से पूरे मामले की गहन पड़ताल कराई गई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। शासन की प्राथमिकता पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन सुनिश्चित करना है तथा जनधन के दुरुपयोग और पद के दुरुपयोग के मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी।
राज्य सरकार की इस कार्रवाई को उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।

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