
पिथौरागढ़, 3 जून। विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की थीम “प्रकृति से प्रेरित, जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए” के तहत 130 इन्फैंट्री बटालियन (टीए) ईको कुमाऊँ द्वारा आयोजित विश्व पर्यावरण सप्ताह के अंतर्गत बुधवार को यक्षवती नदी पुनर्जीवन अभियान एवं वृहद पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सेना, अर्धसैनिक बलों, एनसीसी कैडेट्स, स्कूली विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों की सहभागिता से पर्यावरण संरक्षण का मजबूत संदेश दिया गया।
रई बगड़ क्षेत्र में यक्षवती नदी के किनारे चलाए गए स्वच्छता एवं पुनर्जीवन अभियान में 130 इन्फैंट्री बटालियन (टीए) ईको कुमाऊँ, 12 कुमाऊँ, एसएसबी के जवानों, एनसीसी कैडेट्स तथा जनरल बी.सी. जोशी आर्मी पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। अभियान के दौरान नदी तटों और जलधारा के आसपास फैले प्लास्टिक, पॉलीथीन एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थों को हटाकर व्यापक सफाई की गई। साथ ही जल स्रोतों के संरक्षण और स्वच्छता के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक किया गया।
यक्षवती नदी पिथौरागढ़ नगर की प्रमुख जीवनरेखा मानी जाती है, जो वर्षों से स्थानीय नागरिकों और सैन्य प्रतिष्ठानों को पेयजल उपलब्ध कराती रही है। बढ़ते प्रदूषण और मानवीय हस्तक्षेप से उत्पन्न चुनौतियों के बीच यह अभियान नदी संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
इसी क्रम में देवकटिया क्षेत्र में 130 इन्फैंट्री बटालियन (टीए) ईको कुमाऊँ के नेतृत्व में 348 मीडियम रेजिमेंट तथा 14वीं बटालियन आईटीबीपी के सहयोग से वृहद पौधरोपण अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान विभिन्न प्रजातियों के 1000 पौधों का रोपण किया गया। यह पहल क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ाने, मृदा संरक्षण को बढ़ावा देने और जैव विविधता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
130 इन्फैंट्री बटालियन (टीए) ईको कुमाऊँ के सहायक कमान अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल वीएस दानू ने बताया कि बटालियन उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण, वनीकरण, जल स्रोत संरक्षण और मृदा संरक्षण से जुड़े कार्यों में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण सप्ताह के दौरान आयोजित गतिविधियां पर्यावरण संरक्षण के प्रति सेना की सतत प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की स्वच्छता तथा वृक्षारोपण को जन-आंदोलन बनाने का संकल्प लिया। स्थानीय नागरिकों और विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने यह संदेश दिया कि सामूहिक प्रयासों से ही प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और सतत विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।








