इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ ने किया अभाविप राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन
देहरादून 28 नवम्बर । अखिल भारतीय
विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के 71वें राष्ट्रीय अधिवेशन का भव्य शुभारंभ शुक्रवार को देहरादून के परेड ग्राउंड में अस्थाई रूप से बसाए गए ‘भगवान बिरसा मुंडा नगर’ के ‘जनरल विपिन रावत सभागार’ में हुआ। अधिवेशन का उद्घाटन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. एस. सोमनाथ ने किया। इस विशेष अवसर पर अभाविप के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रघुराज किशोर तिवारी, पुनर्निर्वाचित राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी, राष्ट्रीय मंत्री कु. क्षमा शर्मा, राष्ट्रीय अधिवेशन स्वागत समिति अध्यक्ष एवं ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. कमल घनशाला, स्वागत समिति महामंत्री एवं उत्तराखण्ड जलागम परिषद के उपाध्यक्ष रमेश गाड़िया, अभाविप उत्तराखण्ड प्रांत अध्यक्ष डॉ. जे.पी. भट्ट और प्रांत मंत्री ऋषभ रावत उपस्थित रहे।
विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के 71वें राष्ट्रीय अधिवेशन का भव्य शुभारंभ शुक्रवार को देहरादून के परेड ग्राउंड में अस्थाई रूप से बसाए गए ‘भगवान बिरसा मुंडा नगर’ के ‘जनरल विपिन रावत सभागार’ में हुआ। अधिवेशन का उद्घाटन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. एस. सोमनाथ ने किया। इस विशेष अवसर पर अभाविप के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रघुराज किशोर तिवारी, पुनर्निर्वाचित राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी, राष्ट्रीय मंत्री कु. क्षमा शर्मा, राष्ट्रीय अधिवेशन स्वागत समिति अध्यक्ष एवं ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. कमल घनशाला, स्वागत समिति महामंत्री एवं उत्तराखण्ड जलागम परिषद के उपाध्यक्ष रमेश गाड़िया, अभाविप उत्तराखण्ड प्रांत अध्यक्ष डॉ. जे.पी. भट्ट और प्रांत मंत्री ऋषभ रावत उपस्थित रहे।उद्घाटन सत्र के दौरान अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने संगठन की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि अभाविप ने इस वर्ष सदस्यता के सभी पिछले रिकॉर्ड तोड़ते हुए 76,98,448 विद्यार्थियों तक अपनी पहुँच बनाई है। अभाविप की 77 वर्षों की संगठनात्मक यात्रा में यह अब तक की सर्वाधिक सदस्य संख्या है। उद्घाटन सत्र के बाद “युवा भारत का आह्वान” विषय पर विशेष भाषण सत्र आयोजित किया गया, जिसमें अभाविप के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने वक्ता के रूप में विचार व्यक्त किए तथा इसी विषय पर समानांतर समूह चर्चाएँ भी आयोजित की गईं।
अधिवेशन के मुख्य अतिथि डॉ. एस. सोमनाथ ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि किसी भी राष्ट्र का उत्थान तभी संभव है जब उसकी युवा पीढ़ी ज्ञान, तकनीक और निडर शक्ति से सम्पन्न हो। उन्होंने कहा कि युवा वर्तमान के ध्वजवाहक ही नहीं, बल्कि भविष्य के आधारस्तंभ भी हैं और जिस प्रकार भारत विश्व पटल पर उभर रहा है, उसी प्रकार युवाओं का योगदान निर्णायक है। उन्होंने बताया कि भारत की 25 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या युवाओं की है, जो एक सांस्कृतिक वरदान है। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 सहित अनेक अंतरिक्ष मिशनों के माध्यम से भारत ने वैश्विक नेतृत्व का मार्ग प्रशस्त किया है और यह युवा शक्ति ही है जो भविष्य में देश को और ऊंचाइयों तक ले जाएगी। उन्होंने कहा कि बिना भय के नवाचार करना ही युवा का धर्म है और अभाविप ने सिद्ध किया है कि सच्चा नेतृत्व सदैव सेवा में निहित होता है। जब हर हाथ में हुनर, हर मन में विश्वास और हर दिल में भारत होगा तभी विकसित भारत का स्वरूप पूर्णता को प्राप्त होगा।
राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रघुराज किशोर तिवारी ने कहा कि अभाविप विश्व का सबसे बड़ा विद्यार्थी संगठन है और यह गौरव संगठन की विशिष्ट कार्यपद्धति तथा समाज में बढ़ती स्वीकार्यता के कारण संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को कर्तव्यपथ पर ले जाने में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है, और अभाविप के शिल्पकार प्रा. यशवंतराव केलकर के योगदान ने संगठन को एक दृढ़ आधार प्रदान किया है।
पुनर्निर्वाचित राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि अभाविप 77 वर्षों की यात्रा में बहुआयामी वटवृक्ष का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि इसकी जड़ें उन अमर बलिदानियों के ध्येय में समाहित हैं जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। स्थापना काल से ही अभाविप ने समाज और शिक्षा जगत को सकारात्मक दिशा देने का कार्य किया है तथा देश के प्रत्येक भाग को एकसूत्र में बांधने का कार्य इसके कार्यकर्ताओं ने निरंतर किया है। उन्होंने कहा कि आज अभाविप का कार्यक्षेत्र न केवल देश के भीतर बल्कि विश्वभर में भारतीय छात्रों तक विस्तृत है, जहां ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को मजबूत बनाने का सतत प्रयास हो रहा है। उन्होंने उपस्थित प्रतिनिधियों से अपील की कि वे इस तीन दिवसीय अधिवेशन से सीख लेकर अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में लौटें और छात्रशक्ति को गतिमान करते हुए राष्ट्र के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
Author: Day Night Khabar
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