ब्रह्मानूभूति होने के उपरांत ही जीवन में भक्ति का आरम्भ

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देहरादून 17 मार्च। परमात्मा जानने योग्य है, इसे जाना जा सकता है। हम सभी यहां विशाल रूप में यही चर्चा कर रहे हैं कि हमारे जीवन में निरंकारी सतगुरु के सानिध्य से हम सबने इस रमे राम को जाना है, जो पहले भी हमारे साथ था लेकिन ज्ञान की नजर पूर्ण सद्गुरु से ही प्राप्त हुई। उक्त आशय के उदगार दिल्ली से पधारे सुखदेव सिंह (जनरल सेक्रेटरी संत निरंकारी मंडल) ने हरिद्वार बाईपास रोड स्थित निरंकारी सत्संग भवन के तत्वावधान में रविवारीय सत्संग कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए निरंकारी सद्गुरु सुदीक्षा महाराज एवं राजापिता रमित का पावन संदेश देते हुए व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि युद्व के मैदान में अर्जुन को भी ऐसी नजर भगवान श्री कृष्ण जी ने दी तब अर्जुन ने हाथ जोड़ कर प्रार्थना की आपकी कृपा से ही मैंने आपके निराकार रूप का दर्शन किया और आपका जो विराट स्वरूप है जिसे शस्त्र काट नहीं सकता, अग्नि जला नहीं सकती, हवा उड़ा नहीं सकती, पानी से इसे भिगाया जा नहीं सकता, जो अखंड, अनंत, बेअंत कायम दायम रहने वाला सर्वव्यापक परमात्मा है। ऐसी परमसत्ता का संग ही सत्संग होता है जो ब्रह्मज्ञानी के लिए निरन्तर जरूरी है।
मसूरी जोन के जोनल इंचार्ज हरभजन सिंह एवं स्थानीय संयोजक नरेश विरमानी ने दिल्ली से पधारे सुखदेव सिंह का आभार प्रकट करते हुए बाल संगत के बच्चों के द्वारा फूल का गुलदस्ता भेंट किया और स्थानीय सेवादल के इंचार्ज मनजीत सिंह के नेतृत्व में सेवादल के भाई बहनों ने उनका स्वागत किया।

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