
केवट लीला और राम-भरत मिलाप के भावपूर्ण मंचन ने दर्शकों को किया भावविभोर, रोहित चौहान की प्रस्तुति ने पुरानी टिहरी की यादें कीं ताजा
देहरादून 16 अक्टूबर । रेसकोर्स स्थित श्री गुरु नानक मैदान में आयोजित भव्य रामलीला महोत्सव-2026 का पंचम दिवस हिमालय संरक्षण दिवस के रूप में मनाया गया। इस दौरान केवट लीला और राम-भरत मिलाप के भावपूर्ण मंचन ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। प्रसिद्ध गढ़वाली लोकगायक रोहित चौहान की भावुक प्रस्तुति ने भी दर्शकों की आंखें नम कर दीं।
कार्यक्रम में पंचायती राज मंत्री मदन कौशिक, देहरादून के महापौर सौरभ थपलियाल और पूर्व विधायक राजकुमार मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। रामलीला के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण की वनयात्रा के बीच केवट प्रसंग का प्रभावशाली मंचन किया गया। नाव और सरयू नदी की पृष्ठभूमि के साथ आधुनिक तकनीकी प्रभावों ने पूरे प्रसंग को जीवंत बना दिया। इसके बाद राम-भरत मिलाप के मार्मिक दृश्य ने पंडाल में भावनाओं का ज्वार ला दिया। भरत का भाई के प्रति प्रेम, त्याग और समर्पण दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहा।
लोकगायक रोहित चौहान ने गढ़वाली गीत ‘ऐ विधाता मेरी पितरों की बसाई, टिहरी…’ की भावुक प्रस्तुति दी। गीत के माध्यम से पुरानी टिहरी के डूबने की पीड़ा और स्मृतियों को जीवंत किया गया। उनकी प्रस्तुति पर दर्शक भावविभोर हो उठे।
समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा कि हिमालय उत्तराखंड की पहचान, जीवनरेखा और सांस्कृतिक विरासत है। हिमालय संरक्षण, वनों को बचाना, पौधारोपण और लोकसंस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि रामलीला जैसे आयोजन आस्था के साथ प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने का भी सशक्त माध्यम हैं।
पंचायती राज मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि रामलीला जैसे आयोजन धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने के साथ नई पीढ़ी को भारतीय संस्कारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। महापौर सौरभ थपलियाल ने कहा कि सांस्कृतिक आयोजनों के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना वर्तमान समय की आवश्यकता है। पूर्व विधायक राजकुमार ने पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला को देहरादून में जीवंत रखने के प्रयास को उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में सराहनीय कदम बताया।
इस अवसर पर ग्रीन बैंक के संस्थापक चंदन सिंह नेगी द्वारा पर्यावरण संरक्षण और पौधारोपण के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की गई। कार्यक्रम में पूर्व विधायक राजकुमार, शिवसेना प्रदेश अध्यक्ष गौरव कुमार, यूकॉस्ट के पूर्व निदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल, कांग्रेस के राष्ट्रीय संचार सचिव वैभव वालिया, चंदन सिंह नेगी, लोकगायक रोहित चौहान और राज्य आंदोलनकारी मोहन सिंह खत्री सहित कई गणमान्य अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया गया।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1952 में पुरानी टिहरी से शुरू हुई रामलीला की परंपरा टिहरी के जलमग्न होने के बाद देहरादून में पुनर्जीवित की गई है। वर्ष 2025 में विभिन्न माध्यमों से इसे 85 लाख से अधिक दर्शकों ने देखा था। इस वर्ष डिजिटल प्रसारण के माध्यम से एक करोड़ से अधिक दर्शकों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।
श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून की ओर से आयोजित भव्य रामलीला महोत्सव 8 से 25 अक्टूबर तक श्री गुरु नानक मैदान, रेसकोर्स में चल रहा है। रामलीला का मंचन 11 से 21 अक्टूबर तक होगा। 20 अक्टूबर को रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन तथा 21 अक्टूबर को भगवान श्रीराम का राजतिलक किया जाएगा।







