अशासकीय विद्यालय प्रबंधक एसोसिएशन देहरादून का पुनर्गठन

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डॉ. सुनील अग्रवाल संरक्षक, संजीव विरमानी अध्यक्ष और लोकेश बहुगुणा बने सचिव

देहरादून 4 अक्टूबर। अशासकीय विद्यालयों के संचालन में आ रही विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए अशासकीय विद्यालय प्रबंधक एसोसिएशन देहरादून का पुनर्गठन किया गया। मंगला देवी इंटर कॉलेज में आयोजित बैठक में जनपद के 45 अशासकीय विद्यालयों के प्रबंधकों ने भाग लिया। बैठक में विद्यालयों से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा के साथ नई कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से गठन किया गया।

निजी कॉलेज एसोसिएशन उत्तराखंड के अध्यक्ष डॉ. सुनील अग्रवाल को एसोसिएशन का संरक्षक चुना गया। वहीं संजीव विरमानी को अध्यक्ष, राधेश्याम पैन्यूली को उपाध्यक्ष, लोकेश बहुगुणा को सचिव, नूर अहमद को सहसचिव और वीएस चौधरी को कोषाध्यक्ष बनाया गया। कार्यकारिणी सदस्य के रूप में शिव सिंह, सुरेश कुमार अरोड़ा, बाबू सिंह चौहान, दीपक सैनी और दिगंबर प्रसाद जैन का चयन किया गया।

चुनाव अधिकारी राजेश चंद्र शर्मा और महावीर सिंह मेहता ने संगठन के प्रांतीय संरक्षक चंद्र मोहन पयाल तथा चुनाव पर्यवेक्षक एवं प्रांतीय उपाध्यक्ष उत्तम सिंह नेगी की देखरेख में सभी पदों पर सर्वसम्मति से निर्वाचन की घोषणा की।

प्रांतीय संरक्षक चंद्र मोहन पयाल ने सभी निर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि डॉ. सुनील अग्रवाल अपने उच्च शिक्षा क्षेत्र के अनुभव के आधार पर एसोसिएशन को दिशा देने के साथ शासन-प्रशासन के समक्ष अशासकीय विद्यालयों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

संरक्षक डॉ. सुनील अग्रवाल ने कहा कि अशासकीय विद्यालय अपने संसाधनों से सरकार के शिक्षा के कार्य में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षित सरकारी सहायता नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों की समस्याओं के समाधान के लिए शासन-प्रशासन से वार्ता की जाएगी। साथ ही अशासकीय विद्यालयों के प्रबंधकों के आत्मसम्मान और गरिमा को पुनर्स्थापित करते हुए विद्यालयों के विकास के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अशासकीय विद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए भी ठोस प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। इस दिशा में विद्यालयों को अपने स्तर पर प्रयास करने पड़ रहे हैं और सरकारी स्तर पर किए जा रहे प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे हैं।

बैठक में विद्यालयों के संचालन, प्रबंधकों की समस्याओं तथा शासन-प्रशासन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया। चुनाव प्रक्रिया में मंगला देवी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य सुभाष चंद्र और विद्यालय के स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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