
देहरादून 7 सितंबर ।उत्तराखण्ड के लोक कलाकारों एवं सांस्कृतिक दलों ने संस्कृति विभाग के अधिकारियों पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आदेशों और घोषणाओं की अवहेलना करने का आरोप लगाया है। लोक कलाकार संरक्षण संघ, उत्तराखण्ड ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर कलाकारों की विभिन्न मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि 2 जून 2025 को उत्तराखण्ड के लोक कलाकारों एवं सांस्कृतिक दलों ने अपनी मांगों को लेकर संस्कृति मंत्री के समक्ष एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया था। संगठन के अनुसार, इस मामले का संज्ञान मुख्यमंत्री कार्यालय ने लिया था और मुख्यमंत्री पोर्टल के माध्यम से संस्कृति निदेशालय को कलाकारों के हित में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।
लोक कलाकार संरक्षण संघ का कहना है कि निर्देशों के तहत पूर्व की भांति सांस्कृतिक दलों को कार्यक्रम आवंटन, बिलों का भुगतान, मानदेय में वृद्धि, कलाकारों की पेंशन, कलाकार कल्याण कोष से सहायता तथा यात्रा भत्ते से संबंधित व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने की अपेक्षा की गई थी। साथ ही कार्यक्रम आवंटन में रोस्टर प्रणाली और अन्य प्रशासनिक बाध्यताओं को समाप्त करने की मांग भी उठाई गई थी।
संगठन ने आरोप लगाया कि एक वर्ष बीतने के बाद भी कलाकारों के हित में की गई घोषणाओं और निर्देशों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। इससे लोक कलाकारों और सांस्कृतिक दलों में निराशा है और उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है।
ज्ञापन में कहा गया कि उत्तराखण्ड के लोक कलाकारों ने प्रदेश और देश के महत्वपूर्ण आयोजनों में लगातार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से राज्य का मान-सम्मान बढ़ाया है। जी-20 जैसे आयोजनों से लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विदेशी अतिथियों के स्वागत तक कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संगठन ने पिथौरागढ़ में छोलिया नृत्य की प्रस्तुति के माध्यम से गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने का भी उल्लेख किया।
लोक कलाकारों ने मुख्यमंत्री से कार्यक्रम आवंटन की प्रक्रिया को संस्कृति विभाग के माध्यम से पूर्व की भांति संचालित करने, कार्यक्रम आवंटन में जीएसटी की बाध्यता समाप्त करने और वरिष्ठ सांस्कृतिक दलों को बार-बार ऑडिशन प्रक्रिया से नहीं गुजारने की मांग की है।
इसके अलावा बढ़ती महंगाई को देखते हुए कलाकारों के मानदेय और यात्रा भत्ते में वृद्धि, सरकारी आयोजनों और सरकारी अनुदान से आयोजित मेलों में 80 प्रतिशत भागीदारी उत्तराखण्ड के स्थानीय सांस्कृतिक दलों और लोक कलाकारों की सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है।
संगठन ने पर्यटन स्थलों, उच्च श्रेणी के होटलों, मंदिरों और पार्कों में नियमित रूप से उत्तराखण्डी लोक संस्कृति की प्रस्तुतियां आयोजित कराने का सुझाव दिया है, ताकि कलाकारों को रोजगार मिल सके और प्रदेश में आने वाले पर्यटक स्थानीय संस्कृति से रूबरू हो सकें।
ज्ञापन में पंजीकृत सांस्कृतिक दलों, दल प्रमुखों और लोक गायकों के लिए पहचान पत्र जारी करने तथा कार्यक्रम आवंटन, बिल भुगतान, लोक कार्यशालाओं और वेशभूषा से जुड़े कार्यों का नोडल विभाग संस्कृति निदेशालय को बनाए रखने की मांग भी रखी गई है।
लोक कलाकार संरक्षण संघ ने वरिष्ठ कलाकारों के सम्मान के लिए प्रतिवर्ष सम्मान समारोह आयोजित करने की भी मांग की है। संगठन का कहना है कि इससे नई पीढ़ी को उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति से जोड़ने और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
संघ ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले का संज्ञान लेकर लोक कलाकारों और सांस्कृतिक दलों की मांगों का शीघ्र समाधान कराने की मांग की है।









